पथरी की समस्या से है परेशान तो करें ये आसान उपाय

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पथरी की समस्या –

अधिक देर तक कंप्यूटर, टीवी, वीडियोगेम में लगे रहने से एवं तला भुना और वसा युक्त भोजन का सेवन करने से, मोटापा,पानी कम पीने जैसी गलत आदतों के कारण पथरी के मरीज ज्यादा बढ़ रहे है। हमारी अंत:स्रावी ग्रंथियों से जुड़ी एक समस्या होती है जिसके कारण हमारे पेशाब में केल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है यदि यह मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है तो बेहतर रहता है पर यदि यह कैल्शियम बाहर न निकल कर गुर्दे की कोशिकाओं जाकर जम जाता है जिससे मूत्राशय की नलियों में रुकावट भी आ जाती है और धीरे -धीरे यह पथरी का रूप ले लेता है मूत्र में कैल्शियम की अधिकता हाइपरकैल्सियूरिया कहलाती है। यह समस्या अधिकतर कैल्शियम वाले भोजन को खाने से होती है। कैल्शियम ऑग्जेलेट या फॉस्फेट के कण अधिक मात्रा में हों तो वह मूत्र के माध्यम पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते और एक जगह इकट्टे होने लगते हैं। यही कण पथरी का रूप ले लेते हैं। किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी होना बहुत दर्द देती है। हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि यह समस्या बहुत आम हो गई है। पथरी की जाँच के लिए डॉक्टर पहले सी.टी स्कैन कराते थे लेकिन अब टेक्नोलॉजी के कारण इसकी जाँच कराना काफी आसान हो गया है। गुर्दे की पथरी की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती हैं। आमतौर पर 7 पुरूषों में से 1 और 10 महिलाओं में से 1 को पथरी की समस्या होती है। अधिकतर इनकी उम्र 30-60 वर्ष के बीच होती है।
मेडिकल भाषा में गुर्दे की पथरी की बैफ्रोलिथिओसिस कहा जाता है। गुर्दे की पथरी से से पीड़ित व्यक्ति को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। गुर्दे की पथरी पेशाब में बाधा उत्पन्न करती है। अगर आप इससे ग्रसित हैं तो आपके पेट और जांघ के बीच के हिस्से में दर्द होता है। जिसके कारण कई बार आपको मूत्र संबंधी संक्रमण भी हो सकता है जिन्हें गुर्दे की पथरी पहले से हो उन्हें 5 साल बाद फिर से पथरी हो सकती है रक्त में बेकार तत्व क्रिस्टल्स का निर्माण करते हैं, जो गुर्दे के अंदर एकत्र हो जाते हैं। धीरे-धीरे यही क्रिस्टल्स सख्त पत्थर जैसी गुठलियां बन जाती हैं। अगर आप अधिक मात्रा में तरल पदार्थो का सेवन नहीं करते है तो ऐसा होना आम बात है। अगर आप किसी तरह की दवाई खा रहे है तो उससे भी गुर्दे की पथरी हो सकती है। लगभग 90 प्रतिशत गुर्दे की पथरी की समस्या गलत खान-पान के कारण होती है। अगर आप अपनी डाईट में बदलाव करके आप पथरी के खतरे से बचा जा सकता है। पथरी किडनी के अतिरिक्त मूत्रवाहिनी और मूत्राशय में सामान्य रूप से पायी जाती है। मूत्रवाहिनी में पायी जाने वाली पथरी का आकार रेत के छोटे से कण से लेकर एक गेंद जितना हो सकता है। पथरी से उत्पन्न होने वाले दर्द की मात्रा इसके आकार पर निर्भर करती है। जहाँ छोटी, चिकनी और गोल पथरी से कम दर्द होता है वहीं दानेदार सतह वाली और चपटी पथरी अत्यधिक दर्द का कारण बनती है। मूत्रमार्ग में होने वाली पथरी भी असहनीय दर्द देती है।

पथरी होने के अन्य कारण-

पथरी के बनने का मुख्य कारण पेशाब में कैल्सियम, आग्सलेट और अन्य क्रिस्टल्स का एक जगह इकट्ठा होकर मूत्रमार्ग में कठोर पदार्थ का निर्माण होना है। पथरी सामान्य रूप से कैल्शियम और यूरिक एसिड से निर्मित होती है। वहीं स्त्रियों में होने वाली स्ट्रवाइट पथरी का कारण मूत्रमार्ग का संक्रमण होता है। पुरुषों को पथरी का ख़तरा महिलाओं की अपेक्षा 2 से 3 गुना अधिक होता है।
कम पानी पीने की आदत के कारण,अगर परिवार में किसी बड़े को पथरी होती थी तो यह आपको भी हो सकती है,मूत्रमार्ग में बार-बार इन्फेक्शन हो जाना,
अधिक देर तक मूत्र को रोके रखना,विटामिन ‘सी’ या कैल्शियम वाली दवाओं का ज्यादा सेवन करना,लम्बे समय तक बेड रेस्ट पर रहना आदि कारणों से पथरी की समस्या हो सकती है

गुर्दे की पथरी के लक्षण –

पेशाब करते समय दर्द होना, पेशाब में खून आना, पेशाब में धुधंलापन होना,पेशाब में असामान्य गंध आना,​सामान्य से अधिक बार पेशाब करने की इच्छा होना, रुक-रुक कर पेशाब का आना,
तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं अगर आपको दर्द के साथ निम्नलिखित में से कोई लक्षण होते हैं।
मतली या उल्टी होना, सर्दी लगना,बुखार आना,इतना भयंकर दर्द होना कि आप आराम से बैठ, खड़े या लेट ही न पाएं, पेशाब करने में कठिनाई होना।

बचाव के उपाय-

खूब पानी पीना है इससे मूत्र में मौजूद उन पदार्थो को गलाता है जो पथरी पैदा करते है। प्रतिदिन इतना पानी जरुर पियें। जिससे आपको 2 लीटर मूत्र आये।
निम्बू पानी और संतरे के जूस का सेवन करें। इन खट्टे पेयों को पीने से इसमें मौजूद साइट्रेट पथरी को बनने से रोकता है।
मांस,अंडे ,मुर्गी और समुद्री भोजन आदि का सेवन करने से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ता है।जिससे गुर्दे की पथरी हो सकती है।
पथरी बनाने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन नहीं करें जैसे चोकलेट चुकंदर ,पालक,चाय और अधिकांश मेवों में ऑक्सलेट होता है।जिससे पथरी बनती है।

पथरी के घरेलू उपचार-

अनार का जूस –एक अनार लेकर उसके दानों को बाहर निकालकर अनार के दानों को जूसर में पिस लें। उसमे थोडा सा पानी डालकर पी लें। अनार पथरी में बहुत लाभदायक है।
खूब पानी पिएं – दिनभर एक से डेढ़ घंटे के अन्तराल में एक-एक गिलास पानी पीते रहे। दिन में कम से कम 8-10 बार पानी जरुर पियें।
तुलसी- पांच-छह तुलसी की पत्तियां लेकर 10 मिनट तक एक कप गर्म पानी में डूबा रहने दे। बाद में इसमें स्वादनुसार शहद मिलाकर इस चाय को दिन में दो से तीन कप पी सकते है।
सौंफ- एक चम्मच सौंफ पाउडर लेकर एक कप गर्म पानी में मिलाएं और इसे कुछ देर ऐसे ही छोड़ दें। जब मिश्रण ठंडा हो जाये तो इसे अच्छे से मिलाकर पी लें।
नारियल पानी- दिन में दो से तीन बार नारियल पानी का सेवन करें। यह गुर्दे की पथरी काफी लाभदायक होता है।
धन्यवाद