मलेरिया रोग का आसान घरेलू उपचार

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मलेरिया रोग-
बारिश का मौसम रोगों को आमंत्रित करने वाला मौसम होता है, क्योंकि इस मौसम में बरसात से कई जगहों पर गड्डो में पानी भरने, कीचड़ व गंदगी से मच्छर व बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते है जो अनेक प्रकार की बीमारियाँ फैलाते है। इसके अलावा मौसम में नमी और उष्णता के कारण बैक्टीरिया और वायरस अधिक पनपते हैं जो पानी और खाद्य पदार्थों को दूषित कर देते है, और शरीर में बीमारियों का कारण बनते हैं। इनमें से मलेरिया भी एक वायरल संक्रमण है। मलेरिया बारिश के मौसम में होने वाली एक आम लेकिन गंभीर संक्रामक बीमारी है। मलेरिया एक बीमारी है जिसमे पीड़ित को सर्दी जुकाम और सिरदर्द के साथ बार-बार तेज बुखार आ जाता है। इसमें कभी बुखार उतर जाता है तो कभी वापस आ जाता है बुखार के दिमाग में चढने पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है या उसकी मृत्यु तक हो जाती है। मलेरिया मादा एनोफेलिज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने पर यह प्लाज़्मोडियम नामक परजीवी को शरीर में छोडता है जिसके कारण यह बीमारी फैलती है। यह बीमारी उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है जिसमें सब-सहारा अफ्रीका में सबसे अधिक लोग इससे प्रभावित होते है पुरे एशिया के अधिकतर देश भी इसमें शामिल हैं। और इंडिया में तो यह रोग पुरे साल ही रहता है। लेकिन बारिश के मौसम मच्छर का प्रजनन अधिक होता है इसलिए बारिश के मौसम में यह बीमारी अधिक होती है विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में मलेरिया के हर साल 40 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित होते है। और इससे लगभग हर साल लगभग 10 से 30 लाख मौतें हो जाती है। कहने का मतलब यह है कि हर सेकेंड में 30 मौतें। इनमें से अधिकतर पाँच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चें होते हैं, वही इसके बाद गर्भवती महिलाएँ इससे अधिक प्रभावित होती है। इसको रोकने और इलाज के लगातार प्रयासों के बावजूद भी इसके मामलों में कोई गिरावट नहीं आई है यदि मलेरिया की वर्तमान प्रसार दर बनीं रही तो अगले 20 सालों में मृत्यु दर दूगनी हो जाएगी। हालाँकि मलेरिया के बारे में वास्तविक आकँडे तो उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि अधिकतर रोगी ग्रामीण क्षेत्रों में रहते है।,और वह लोग ना ही अस्पताल जाते है और ना ही इनके मामलो का लेखा जोखा रखा जाता है।
मलेरिया के लक्षण- तेज बुखार आना,सर्दी लगना,कंपकंपी छुटना,पसीना आना, सिर में दर्द होना, पुरे बदन और जोड़ों में दर्द होना,जी मचलना, उल्टी होना,आदि लक्षण होते है और यह लक्षण हर 2 से 3 दिन में दोबारा हो सकते है।
मलेरिया से बचाव के उपाय-

  • अपने आसपास साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • रात को मच्छर दानी लगाकर सोये।
  • आमतौर पर मलेरिया वाले मच्छर शाम को अधिक काटता है।
  • घर के खिड़की,दरवाजों पर जाली लगायें।
  • ऐसे कपड़े पहने जिससे पूरी तरह आपका शरीर ढका रहें। और हल्के रंग के कपड़े पहने।
  • घर में एसी या पंखे का इस्तेमाल करे ताकि मच्छर एक जगह पर नहीं बैठे।
  • घर में मच्छर मारने वाली दवा का छिडकाव करें।
  • ऐसी जगह पर नहीं जाएँ झाड़ियाँ अधिक हो और जहाँ गन्दा पानी इक्कठा हो क्योंकि वहां पर मच्छर अधिक पाए जाते है।
    मलेरिया का घरेलू उपचार-
  • गिलोय – मलेरिया होने पर गिलोय का काढ़ा बनाकर उसमे शहद मिलाकर 40ml से 70 ml तक सेवन कर सकते है।
  • नीम का पेड़- नीम के पेड़ मलेरिया नाशक के रूप में प्रसिद्ध है। कुछ नीम के पत्ते लेकर उसमें चार काली मिर्च को एक साथ पीसकर इसको थोड़े से पानी में उबाल लें इस पानी को छानकर पी लें। इससे बुखार में आराम मिलता है। नीम के तने की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार पीने से लाभ होता है। इसके अलावा नीम तेल में नारियल या सरसों का तेल मिलाकर शरीर पर मालिश करने से भी मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
  • अमरुद का सेवन मलेरिया में लाभदायक होता है। मलेरिया होने पर पीड़ित को प्रतिदिन दिन में तीन बार अमरुद अवश्य खिलाएं। इसके अलावा अमरूद के छिलके में विटामिन ‘सी’ काफी ज्यादा होता है। इसलिए अमरूद को छिलके सहित खाएं तो अधिक लाभ होगा।
  • मलेरिया के इलाज साथ आप ताजा फलों और ताजा फलों का जूस देना बहुत लाभदायक रहता है। इसके साथ ही तरल पदार्थों का सेवन भी करते रहना चाहिए। विशेषकर नींबू पानी का सेवन करें। इसके अलावा, इसके इलाज में हल्का व्यायाम और टहलना भी अच्छा रहता है।
  • तुलसी- 10 ग्राम तुलसी के पत्ते और 7-8 काली मिर्च को पानी में पीसकर इसको सुबह और शा‍म सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है। इसमें आप शहद भी मिला सकते हैं।
  • अदरक का सेवन मलेरिया में बहुत फायदेमंद है। 2-3 चम्मच किशमिश और थोड़ा सा अदरक डालकर पानी के साथ उबालें। इसे तब तक उबालें जब तक पानी उबलकर आधा रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर इसे दिन में दो बार लें। मलेरिया बुखार उतर जाएगा।