संग्रहणी रोग (IBS) की समस्या है तो करें यह आसान उपाय

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संग्रहणी रोग (IBS)
आजकल लोगों ने इस भागदौड भरी लाइफस्टाइल में खुद को इतना व्यस्त कर दिया है जिससे वह अपनी सेहत और स्वास्थ्य का ध्यान रखना तो जैसे भूल ही गया है। जिससे तनाव बढ़ रहा है और तनाव से भरी दिनचर्या में लोग अनेक बिमारियों से ग्रस्त हो रहे है। और इन्हीं बिमारियों में से एक है संग्रहणी रोग (आईबीएस)। यह पाचन तन्त्र और बड़ी आंत से जुडी बीमारी है इसे आईबीएस यानि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक सामान्य डिसऑर्डर भी कहते है। यह सबसे ज्यादा बड़ी आंत को प्रभावित करती है। इसमें आंत की तंत्रिकाएं और मांसपेशियां अतिसंवेदनशील हो जाती है और हमारे शरीर की भोजन पचाने वाली अग्नि कमजोर हो जाती है। जिससे हमारा भोजन सही तरीके से पच ही नहीं पाता है। जब भोजन सही तरीके से नहीं पचता है तो आमाशय से छोटी आंत में चला जाता है। और फिर छोटी आंत कुछ पोषक तत्वों का अवशोषण कर उसे बड़ी आंत में धकेल देती है। पर भोजन के सही प्रकार से नहीं पचने के कारण जो पाचक रस होते है वह बिगड़ जाते है जिससे आव का निर्माण होता है। जिससे फिर व्यक्ति को पेट में दर्द होता है और बार-बार पेट में मरोड़ आते है। और उन्हें बार-बार शौच के लिए जाना पड़ता है। इसी को संग्रहणी (IBS) का नाम दिया गया है यह रोग ज्यादातर उन्हीं लोगो को होता है जो जंक फूड और फ़ास्ट फूड ज्यादा खाते है
जो लोग चटपटे मसालेदार खाना खाने के तुरंत बाद सो जाते है जिससे उनका खाना सही से नही पच पाता है। जो लोग ज्यादा खट्टी चीजें खातें है उनको भी यह रोग हो सकता है कहने का मतलब यह है कि जिस व्यक्ति ने अपनी दिनचर्या को बिगाड़ लिया है वह इस रोग से ग्रस्त हो सकता है। खाना खाने के तुरंत बाद अगर आपको शौच के लिए जाना पड़े तो आपको संग्रहणी की समस्या हो सकती है। अगर यह आपको सप्ताह में एक-दो बार या महीने में कभी-कभार यह समस्या होती है। तो डरने की बात नहीं है पर अगर आपको रोजाना यह समस्या होने लग जाए तो आपको यह बीमारी हो सकती है। आजकल युवा लोगों में यह बीमारी आम हो गई है संग्रहणी अक्सर 45 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होती है। पर यह बुजुर्गो को भी हो सकती है और महिलाओं में IBS की समस्या पुरुषों की तुलना में दोगुनी होती है जिनको IBS की समस्या है वो निम्न बातों का ध्यान रखें-
चाय,कॉफी,और अल्कोहल जैसे पदार्थों का सेवन ज्यादा मात्रा में नहीं करें। रोज गुनगुना पानी पीना चाहिए,समय पर सौ जाए और अच्छी नींद लें कम से कम 8 घंटे जरुर सोए। रोजाना आप जिस टाइम पर खाना खाते हो उसी समय पर खाना खाएं,और खाने को चबा-चबाकर खाएं। डेयरी उत्पादों और मसालेदार व तैलीय भोजन बिलकुल भी नहीं करें। बीडी,सिगरेट तम्बाकू और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए। संग्रहणी रोग कितने प्रकार है
यह चार प्रकार की होती है 1. वातज संग्रहणी 2.पित्तज संग्रहणी 3.कफज संग्रहणी 4.सन्निपातज संग्रहणी
1.वातज संग्रहणी -जो व्यक्ति वात पदार्थों का सेवन करता है और वह चीजें जिससे गैस ज्यादा बनती है और जो व्यक्ति अत्यधिक मैथुन करता है जिससे उनकी वायु खराब हो कर जठराग्नि को बिगाड़ देती है। और इससे वातज संग्रहणी उत्पन्न होती है। जिनको वातज संग्रहणी होती है उनको खाया हुआ खाना सही से नही पचता है,भूख नहीं लगती है,प्यास अधिक लगती है जांघों और नाभि में दर्द होता है।
2.पित्तज संग्रहणी – जो व्यक्ति गर्म चीजों का सेवन अधिक करता है मिर्च-मसाले वाले ,खट्टे और खारे पदार्थों का सेवन करता है उसका पित्त दूषित होकर जठराग्नि को बुझा देता है उसके कच्चा मल निकलने लगता है तब पित्तज संग्रहणी होती है। पित्तज संग्रहणी में पीले रंग का पानी सहित मल निकलता है खट्टी डकारें आती है।
3.कफज संग्रहणी – जो व्यक्ति भारी,चिकनी व शीतल चीजें खाते है और भोजन करने के तुरंत बाद सो जाते है उसका कफ दूषित होकर जठराग्नि को बहुत मन्द कर देता है। कफज संग्रहणी में भोजन नहीं पचता है और ह्रदय में दर्द होता है मुँह मीठा-मीठा रहता है खांसी चलती है और मीठी डकारें आती है, बार-बार उल्टी होने का जी करता है।
4. सन्निपातज संग्रहणी -इसमें इन तीनों संग्रहणीयों के लक्षण होते है इसमें खाना खाने के तुरंत बाद पतले और अधपचे मल बाहर आते है
संग्रहणी को ठीक करने के उपाय-
1.सुखा आंवला,काला नमक बराबर मात्र में लें सूखे आंवले को पानी में भिगोकर रखे, जब आंवले मुलायम हो जाए तो उसे काला नमक डालकर बारीक़ पिस लें और उसकी बेर के बराबर की गोलियां बनाकर छाया में सुखाना है उसके बाद उसे डिब्बे में डालकर रख लें, भोजन के आधा घंटा बाद दिन में दो बार लेना है इससे संग्रहणी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगी।
2. पके हुए बेल के फल का रस निकालकर से पुरानी संग्रहणी ठीक हो जाती है कच्चे बेल का गुदा तथा सौंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बनाकर इसमें दुगुनी मात्रा में पुराने गुड़ मिलाकर सेवन करना है उपर से लस्सी पी सकते है। इससे संग्रहणी रोग जड़ से खत्म हो जाता है।
3. 3 से 6 मिलीलीटर काले तिल के रस में 5 गुनी खांड डालकर खाने से संग्रहणी ठीक हो जाती है