अंगमर्दन’ (Angamardana) योग क्रिया

92
Angamardana
अंगमर्दन’ (Angamardana) योग क्रिया ”अंगमर्दन” शब्द का अर्थ हैं अपने हाथ पैरों या शरीर के अंगों पर नियंत्रित करना आप इस दुनिया में जो भी काम करना चाहते हैं, वह आप कितनी अच्छी तरह से करेंगे यह इस बात पर निर्भर करता हैं कि आपका अपने अंगों पर कितना नियन्त्रण हैं।

अंगमर्दन योग एक अनूठी प्रणाली हैं जो आजकल पूरी तरह लुफ्त हो चुकी हैं। क्लासिकल यानी शास्त्रीय योग में पारंपारिक तौर पर अंगमर्दन हमेशा से रहा हैं यह आसनों की तरह नहीं हैं यह बहुत कठोर अभ्यास हैं जहाँ आपको किसी साधन की जरूरत नहीं पड़ती। आप बस अपने शरीर का इस्तेमाल करके अपने अंदर शारीरिक बल तथा द्रढ़ता का बिलकुल अलग स्तर पैदा कर सकते हैं। अंगमर्दन में आप मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ाने के लिए अपने शारीरिक भार और बल का इस्तेमाल करते हैं। यह सिर्फ 25 मिनट की प्रक्रिया होती हैं। यह स्वस्थ और खुशहाली पर बहुत चमत्कारिक असर करता हैं। यह एक अद्भुत प्रक्रिया हैं और अपने आप में संपूर्ण हैं। आपको सिर्फ एक छह गुना छह की जगह चाहिए,और बस आपका शरीर ही सब कुछ हैं। इसलिए आप जहाँ भी हो वहाँ इसे कर सकते हैं। यह किसी भी वेट ट्रेनिंग की तरह प्रभावशाली ढंग से शरीर को पुष्ट बनाता हैं और शरीर पर कोई अनावश्क जोर नहीं डालता। इसका उद्येश्य खुद को ऐसी स्थिति तक पहुंचाना हैं जहाँ आपके शरीर की प्रणाली पूरी तरह काम कर रही होती हैं क्योंकि केवल तभी आपके बोध का स्तर को ऊपर उठाया जा सकता हैं आधे -अधूरे शरीर या आधे-अधूरे जीवन को अनुभव के पूर्ण स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता हैं। बहुत से लोग बड़े-बड़े अनुभव पाना चाहते हैं लेकिन वे अपने शरीर को उस रूप में ढालने को तैयार नहीं जो उन अनुभवों को संभाल पाने में समर्थ हो। योग में, आप किसी अनुभव के पीछे नहीं,आप सिर्फ तैयारी करते हैं।

उदाहरण स्वरूप अगर कोई आदमी पास से गुजरता हैं, तो आप उसके चलने के तरीके से ही साफ-साफ पता लगा सकते हैं, की उसका बदन कसरती हैं या नहीं अगर आप किसी इन्सान का चेहरा देंखे तो,आपको पता चल सकता हैं की उसका मन स्वस्थ हैं या नहीं। इसी तरह किसी को आप काफी करीब से देखें तो आपको स्पष्ट रूप से पता चल सकता हैं की उसकी उर्जा जागृत हैं या नहीं। वे क्या कर सकते हैं या क्या नहीं कर सकते हैं,यह इसी से तय होता हैं पूरी तरह नियन्त्रण होने का मतलब हैं की आप अपनी उर्जा को सक्रिय कर सकते हैं। अगर आप सिर्फ चुपचाप यहाँ बैठे रहे,तो शरीर खुद काम करेगा आपको जाकर कोई काम करने की जरूरत नहीं हैं। अगर कृपा स्वयं आप तक पहुंचाना चाहे,तो आपके पास एक उपयुक्त शरीर का होना जरूरी है। अगर आपके पास उपयुक्त शरीर नहीं हैं और कृपा आपके ऊपर खूब बरसे,तो आप उसे झेल नही पायेंगे। बहुत से लोग बड़े-बड़े अनुभव पाना चाहते हैं लेकिन वे अपने शरीर को उस रूप में ढालने को तैयार नहीं जो उन अनुभवों को संभाल पाने में समर्थ हो। योग में आप किसी अनुभव के पीछे नहीं भागते,आप सिर्फ तैयारी करते हैं अगर आप केवल कहने के लिए ही नहीं,सचमुच आध्यात्मिक प्रक्रिया में गंभीर हैं,तो आपको अपने अंगो पर कुछ नियन्त्रण होना चाहिए।

जब आप अंगमर्दन के माध्यम से अपने अंगों, अंगों और शरीर के अन्य हिस्सों पर पूरी निपुणता के लिए प्रयोग करते हैं, तो यह अपने नाम को पूरक करता है और शरीर को मांसपेशियों, संचार प्रणाली, कंकाल संरचना, तंत्रिका तंत्र और मूल ऊर्जा प्रणाली सहित सभी स्तरों पर पुनर्जीवित करता है। आप सिर्फ अपने शरीर, बिना किसी फिटनेस उपकरण का उपयोग कर रहे हैं, और शारीरिक शक्ति और तप के बिल्कुल अलग स्तर का निर्माण कर रहे हैं। पच्चीस मिनट की प्रक्रिया में आप समय की अवधि में मांसपेशियों के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए अपने शरीर के वजन और गति का उपयोग करते हैं।

योग में निहित एक फिटनेस प्रणाली, अंगमर्दना , सभी शरीर को मज़बूत बनाने और चरम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती है। इसका उद्देश्य खुद को ऐसी स्थिति तक पहुंचाना है जहां आपके शरीर की प्रणाली पूरी तरह काम कर रही होती है क्योंकि केवल तभी आपके बोध के स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। आधे-अधूरे शरीर या आधे-अधूरे जीवन को अनुभव के पूर्ण स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता।

अगर आप इसे सिर्फ एक कसरत के रूप में भी देखें तो भी अंगमर्दन निश्चित रूप से कसौटी पर खरा उतरेगा। लेकिन मांसपेशियों को मजबूत बनाना और मोटापा कम करना इसके सिर्फ छोटे-मोटे फायदे हैं। आप जो भी साधना कर रहे हों, चाहे वह अंगमर्दन हो या कुछ और, उसके बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि हम ऊर्जा प्रणाली को बढ़ाते हुए उसे एक खास स्तर तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, जहां उसकी अखंडता बनी रहे। इसका उद्देश्य खुद को ऐसी स्थिति तक पहुंचाना है जहां आपके शरीर की प्रणाली पूरी तरह काम कर रही होती है क्योंकि केवल तभी आपके बोध के स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। आधे-अधूरे शरीर या आधे-अधूरे जीवन को अनुभव के पूर्ण स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता।

यह भी पढ़े ⇒ प्राणायाम का रहस्य (Mystery of pranayama) ⇐

Angamardana

अंगमर्दन के लाभ

पूरे सिस्टम में बहुत आसानी लाता है, ऊर्जा को सक्रिय करता है और जोड़ों को चिकनाई देता है,
सतर्कता और आजीविका की एक त्वरित भावना पैदा करना। शारीरिक तनाव से राहत देता है जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूत करता है जेट लैग और लंबी यात्रा के प्रभावों को नकारता है अंगमर्दन शरीर के लिगामेंट्स को मज़बूत बनाता है

अंगमर्दन मांसपेशियों के बजाय शरीर के अस्थि बंध या लिगामेंट्स और नसों को अधिक मजबूत बनाता है यह भार उठाने जैसा नही है भार उठाने से मांसपेशिया बनती है अगर आप अंगमर्दन करेगे अस्थि बंध या लिगामेंट्स और नसों का बोज बड़ेगा अस्थि पंजर और मांसपेशिया एक साथ धामकर रखने वाले बेंड सबसे अधिक खीचते है इसी लिए अंगमर्दन आप को अलग तरह की शक्ति और लचीला पन देता है अगर आप अपनी मांसपेशियों को एक खास सीमा से आगे और मजबूत बनाना चहाते है तो आप को बहुत सारी नींद की जरूरत होगी शरीर को अनावश्क मेहनत करनी होगी अगर आपकी मांसपेशिया बहुत बड़ी हो गई तो आप आखें बंद करके आराम से नही बेट सकते अगर आप मजबूती और लचीला पन चाहते तो शरीर की बुनयादी बनावट को मजबूत करना होगा अंगमर्दन वही करता है टूटी हुई हड्डी छ सप्ताह में ठीक होती है अस्थि बंध या लिगामेंट्स के टूटने पर ठीक होने में और मुस्किल होती है क्योकि वही अस्थि पंजर को एक जोड़े रखता है इसे मजबूत बनाने में समय लगता है कम से कम 30 महीने के रोजाना अभ्यास के बाद कुछ लोगों के शरीर अंगमर्दन के अगले स्तर के अभ्यासों के लिए तैयार होते है अगले स्तर के अभासों में और अधिक स्ट्रेचिंग शामिल है जो सामान्य जीवन के लिए जरूरी नही है, उदाहरण के लिए इस की जरूरत उन लोगों को होगी जो लोग बिना रसी के पहाड़ पर चड़ना चहाते है

अंगमर्दन एक अलग तरह की मजबूती देता है इसका मकसत मांसपेशिया बनाना नही बल्कि अस्थि बंध या लिगामेंट्स को मजबूत बनाना है उन्हें मजबूत बनाने के बाद वह आपको जीवन भर ठीक जगह पर रखेंगे

⇒ Destroying the Limbs – Angamardana ⇐ click करे