किडनी फेलियर (Kidney failure)से बचने के सर्वोत्तम तरीके

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क्रोनिक किडनी डिजीज(Kidney failure) –

आज पुरे भारत देश में लगभग 10 करोड़ लोग किडनी रोग(Kidney failure) से पीड़ित है। और हर महीने लगभग 50000 लोगों की मौत इस बीमारी की वजह से हो जाती है अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है की मुझे यह बीमारी नहीं हो सकती है तो वह अपने दिमाग से यह भ्रम निकाल दें। क्योकि इस समस्या में साधारण स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति की जाँच में अचानक उन्हें पता चलता है कि उन्हें क्रोनिक किडनी डिजीज है। क्रोनिक किडनी डिजीज का अर्थ है कि उनके गुर्दे की काम करने की शक्ति घट गयी है या फिर गुर्दे बेकार हो गये है यह समस्या उन लोगो को अधिक होती है जो शरीरिक रूप से मोटे होते है अथवा बीडी सिगरेट आदि का सेवन करते है
जिनको डायबिटीज की समस्या है जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है या ऐसा व्यक्ति जो 50 वर्ष की आयु पार कर चूके है इन्हें सावधान हो जाना चाहिए। और एक बार अपने गुर्दों की जाँच अवश्य करा लेनी चाहिए। यदि समय रहते इसकी जाँच करा ले तो आप अपने शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते है आज प्रत्येक 10 में से एक व्यक्ति कोई न कोई गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त है इससे बचने के लिए आप दैनिक जीवन में होने वाली गलतियों में सुधार करना होगा। हम अपने शरीर को खुद बीमार बनाते है इन गलतियों में खान-पान में होने वाली गलती सबसे आम है जिससे ही शरीर में अनेक बीमारियाँ होती है
गुर्दा हमारे शरीर एक महत्वपूर्ण अंग है जो विषाक्त पदार्थों को मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकालता है और हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है। इसके अतिरिक्त यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखता है, रक्त की अम्लीयता को नियंत्रण करता है और खून में सोडियम और पोटेसियम की मात्रा को भी नियंत्रित करता है। ऐसी स्थिति जब गुर्दे शरीर से अपशिष्ट पदार्थो और शरीर के विषाक्त पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने में अक्षम हो जाता है तो उसे किडनी फेलियर कहा जाता है।
एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में प्रति वर्ष लगभग 2500000 लोग किडनी फेलियर के शिकार हो जाते है। जिसके परिणाम स्वरूप उन लोगों को डायलिसिस करवाने पड़ती है या गुर्दा प्रत्यारोपण करवाना पड़ता है जो बहुत ही जटिल और खर्चीली प्रक्रिया है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी स्थिति आने से पहले ही हमें निरंतर आवश्यक जाँच करवाते रहना चाहिए ताकि आगे जाकर ऐसी नौबत ही नहीं आये। जब किडनी की कार्य क्षमता धीमी होने लगती है और स्थिति बिगड़ने लगती है, तब हमारे शरीर में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों और तरल की मात्रा खतरे के स्तर तक बढ़ जाती है। इसका उपचार का इसके मुख्य कारणों को नियंत्रित करके किया जा सकता है।

किडनी फेलियर के अन्य कारणKidney failure

अगर अधिक देर तक मूत्र को रोककर रखते है तो वह मूत्राशय से वापस किडनी में जाकर जमा हो जाता है। और मूत्र को रोकने से गुर्दों पर दबाव बढ़ता है और उसकी कार्य क्षमता को कम कर देता है। इससे आपको पथरी का रोग भी हो सकता है कुछ विषैले पदार्थ के कारण इनमें ईंधन, सॉल्वैंट्स, सीसा शामिल हैं। यहाँ तक ​​कि कुछ प्रकार के गहनों में विषाक्त पदार्थ होते हैं, जो कि किडनी फेलियेर का कारण बनते हैं।मलेरिया और पीला बुखार होने से किडनियों के कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न होती है।
कुछ दवाएं ऐसी होती है जिसके कारण भी किडनी फेलियर हो सकती है जैसे आईजी दवाएँ एनएसएआईडीएस, एस्पिरिन या इबुप्रोफेन का अधिक मात्रा में सेवन करना। अवैध मादक पदार्थो का अधिक सेवन करना जैसे-जैसे हेरोइन या कोकेन। किडनियों पर तेज़ चोट या झटका लगना आदि कारणों से भी किडनी के ख़राब होने का खतरा रहता है।
बहुत सी बीमारियां तो ऐसी होती हैं, जिनका उपचार आसानी से किया जा सकता है। परन्तु कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनका उपचार संभव तो है परन्तु उसके लिए आपको बहुत परेशानी उठानी पड़ती है और आपके स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा हानि होती है।कुछ किडनी की स्थिति ऐसी हैं जिनमे यदि समय पर व्यक्ति को इलाज ना मिले तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है, जैसे- किडनी फेलियर

किडनी की बीमारी के प्रमुख लक्षण –

मांसपेशियों में ऐंठन होना या महसूस होना,पांवों में सुजन आ जाना,कोई भी काम करने पर जल्दी थक जाना,किसी भी काम में मन नहीं लगना, अच्छी तरह से नींद नहीं आना,पेशाब का आशिक मात्र में आना या सामान्य से कम आना, सेक्स क्षमता में कमी आना, जी खराब होना या उल्टी होना,भूख नहीं लगना
मूत्र का सामान्य से कम या सामान्य से अधिक मात्रा में होना आदि लक्षण हो सकते है।

बचाव के उपाय-

पर्याप्त मात्रा में पानी पियें जिससे खून को शुद्ध करने के लिए शरीर में आवश्यक जल किडनी को उपलब्ध हो।
अधिक देर तक मूत्र को रोककर नहीं रखना चाहिए। इससे पथरी बन सकती है और गुर्दे को भी हानि पहुँच सकती है।
शराब या कोल्डड्रिंक का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से शरीर का प्रोटीन मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाता है। जिसका यह अर्थ है कि उस समय गुर्दा अपनी क्षमता के अनुसार कार्य नहीं कर पाता है। और ज्यादा दिनों तक यही स्थिति रहने पर गुर्दा खराब भी हो सकता है। इसलिए शराब और कोल्ड ड्रिंक का सेवन नही करें।
धूम्रपान और तम्बाकू उत्पादों का अधिक मात्रा में सेवन भी गंभीर गुर्दा समस्या का मुख्य कारण है। इन चीजों का सेवन करने से रक्त नलिकाओं में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और किडनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए धुम्रपान और तम्बाकू से बने उत्पादों का सेवन बिलकुल नहीं करना है।
अगर आप हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से पीड़ित हैं तो समय पर अपना इलाज कराते रहे। नहीं तो इनके इलाज में लापरवाही बरतना भी किडनी की खराबी का कारण बन सकता है।
पेन किलर दवाइयों का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना है नही तो यह गंभीर गुर्दे सम्बन्धी समस्या का कारण बन सकता है इसलिए दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें।
रेड मीट का सेवन नहीं करना है इसका सेवन करने से किडनी सम्बन्धी समस्या को बढ़ावा मिलता है।
फलों और हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन शरीर को पोटेशियम उपलब्ध कराता है और पोटेशियम किडनी के लिए लाभदायक है।
ब्लू बेरी या ब्लैक बेरी का सेवन करना भी गुर्दे के लिए लाभदायक है। बेरीज में क्वीनाइन नामक पदार्थ होता है जो पचकर हिप्यूरिक एसिड में बदल जाता है। हिप्यूरिक एसिड यूरिक एसिड को एक जगह जमने से रोकता है जिससे गुर्दा स्वस्थ रहता है।
साबुत अनाज, नट बीज और हरी सब्जियां मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत हैं और मैग्नीशियम की कमी से हाई ब्लड प्रेशर और विषाक्त पदार्थ रक्त में बढ़ते हैं और गुर्दे पर असामान्य बोझ पड़ता है जो गुर्दे सम्बन्धी समस्या को निमंत्रण देता है।इसलिए मैग्नीशियम की पूर्ति के लिए इनका सेवन अवश्य करें।
तरबूज, बेरीज, मिर्च, सेब, लहसुन, प्याज, गोभी, फूलगोभी और जैतून का तेल किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इसलिए इनका सेवन जरुर करें।

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