साइनस की समस्या(sinus trouble) को ठीक करने के सर्वोत्तम उपाय

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साइनस की समस्या(sinus trouble) –

आजकल की अनियमित जीवन शैली में लोग अपनी सेहत का सही प्रकार से ख्याल नहीं रख पाते, जिसके कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बीमारी आम सर्दी के रूप में शुरू होती है और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के साथ बढ़ जाती है। साइनस (sinus trouble)नाक में होने वाला एक रोग है। इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। जो व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है उसे ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है।
साइनस(sinus trouble) दरअसल मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो हमारे सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में बाधा उत्पन्न करती है। श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकती है। जब व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है, जिससे साइनोसाइटिस नामक बीमारी होती है। साइनस का संक्रमण होने पर इसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण झिल्ली में जो हवा भरी होती है उसमें मवाद या बलगम आदि भर जाता है और साइनस बंद हो जाते हैं। ऐसा होने पर मरीज को परेशानी होनी लगती है।इसका मुख्य कारण झिल्ली में सूजन का आना है। यह सूजन निम्न कारणों से आ सकती है – बैक्टीरिया,फंगल संक्रमण,या फिर नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना।

आप इस बीमारी को आसानी से पहचान सकते हैं। जानिए साइनस के यह प्रमूख लक्षण –

1.सिर का दर्द होना 2.बुखार रहना 3.नाक से कफ निकलना और बहना 4.खांसी या कफ जमना 5.दांत में दर्द रहना 6.नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना 7. चेहरे पर सूजन का आ जाना
8.कोई गंध न आना 9. साइनस की जगह दबाने पर दर्द का होना आदि इसके लक्षण हैं।

साइनस के दौरान कुछ बातों का ध्यान जरूर रखे-

. हमेशा गुनगुने पानी का सेवन करें। ठंडा पानी बिलकुल भी ना पिए।
. ठंडे पानी से न नहाएं।
. धूम्रपान और शराब पूरी तरह से छोड़ दें।
. खाना समय पर ही खाये।
. सही समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें। देर रात तक न जागें।
सर्दी के दिनों में धूप में बैठने से फायदा होता है।
. प्राणायाम : अनुलोम-विलोम प्राणायाम साइनस में बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा उत्तानासन, कपालभाती और कर्नापीड़ासन का अभ्यास साइनस में लाभदायक हैं।

साइनस का घरेलू उपचार-

साइनस के कारण लगातार दर्द होता है और छींक आती रहती है। इससे इंसान कमजोर हो जाता है। बिना दवा के ठीक होने के लिए सबसे जरूरी है आराम और अच्छी नींद। इसके बाद ही कोई घरेलू इलाज कारगर साबित होगा।
. साइनस की स्थिति में पानी या तरल पदार्थों का सेवन खूब करना चाहिए। इससे शरीर हाइड्रेटेड रहेगा यानी पानी की कमी नहीं
होगी। गुनगुना पानी पिएं। अदरक वाली चाय या कॉफी का सेवन भी कर सकते हैं। फलों का जूस पीने के बजाए गरम तासीर वाले फल खाएं। जहां तक संभव हो बहुत ज्यादा मीठे पदार्थों से दूर रहें।
. साइनस में भाप लेना जरूरी होता है। गर्म पानी के बड़े बर्तन में सिर डाले और गर्म भाप लें। नाक के अंदर तक आराम मिलेगा। एक और तरीका यह है कि पानी में नमक और बेकिंग पावडर मिलाएं और सूंघें या स्प्रे बोतल से इसे थोड़ा-थोड़ा नाक में स्प्रे भी किया जा सकता है।
. लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। ये बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है। रोज तीन से चार लहसुन की कली खाने से साइनस में आराम मिलता है। साथ ही ये साइनस के संक्रमण को भी बढ़ने से रोकता है
. इस समस्या के लिए आप गाजर का रस पी सकते हैं। इसे चुकंदर और पालक के रस के साथ भी मिलाकर पी सकते हैं। साइनस की समस्या के लिए ये एक कारगर उपाय है।
. साइनस में नाक के पास की त्वचा को नम रखना होता है। इसके लिए चेहरे पर गर्म पानी की भाप ली जा सकती है या चाहें तो गर्म पानी में तौलिया डुबोकर अपने चेहरे पर रख लें। इसे रोज पांच से दस मिनट करने से आराम मिलेगा।
. नाक और आंखों के चारों ओर जैतून का तेल लगाएं। इससे नाक बंद नहीं होती।
इसके अलावा सिगरेट जैसी धुआं छोड़ने वाली चीजों की वजह से साइनस की समस्या होती है। इसके लिए आपको ऐसी किसी भी चीज से दूर रहना चाहिए।

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