नजला जुकाम (njlaa cold)की समस्या के कारण, प्रकार, उपाय

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नजला जुकाम (njlaa cold)की समस्या –

नजला (njlaa cold)एक आम और कभी भी होने वाली समस्या है। वास्तव में यह बीमारी न होकर शरीर की एक सांवेदनिक प्रतिक्रिया है, जो नाक में धुल के कण जाने या मौसम में बदलाव के कारण होती है। दुनियाभर के सभी लोग कभी न कभी इस के शिकार जरुर हुए है। नजला सर्दी (njlaa cold)के कारण होने वाली एक ऐसी समस्या है

जिसमें हमारा नाक बंद हो जाता है या नाक से पानी बहने लगता है मामूली सी लगने वाली यह समस्या कफ के बढने से हो जाती है। नजला एक ऐसी समस्या है जो किसी भी व्यक्ति को कभी भी हो सकती है। यह रोग वैसे तो मौसम के बदलाव के समय अधिक होता है परन्तु यह बारिश और सर्द दोनों ऋतुओं के बीच के दिनों में अधिक होता है।

यह ज्यादातर वहां अधिक होता है जहाँ वातावरण प्रदूषित व धुल और धुएं से भरे स्थानों तथा बर्फीले इलाकों में यह रोग बगैर किसी शिकायत के भी हो जाता है। गले के अन्य रोग, नाक की बीमारियां, वायु प्रकोप तथा क्षय आदि इस रोग की मदद करते हैं। जिससे यह समस्या तेजी से फैलती है।

आयुर्वेद में नजला-जुकाम(njlaa cold) 6 प्रकार के बताये गये हैं-

1.वातज नजला – वायु से उत्पन्न नजला में नाक में पीड़ा होना, छींक आना, नाक में सुई चुभने जैसी पीड़ा होना,नाक का बहना,होंठ,तलवा, गले का सुख जाना सिर में दर्द रहना और आवाज बैठ जाना आदि लक्षण होते हैं।
2.पित्तज नजला – नाक से गर्म और पीले रंग का स्राव निकलना, बुखार आना,मुंह का शुष्क हो जाना, शरीर कमजोर लगना,त्वचा का चमकरहित होना,बार-बार प्यास लगना,नाक से धुंआ निकलता महसूस होना आदि लक्षण होते है।
3. कफज नजला- सिर में भारीपन होना, आंखों में सूजन आना,खांसी होना,किसी काम में मन नहीं लगना,नाक द्वारा कफ का स्राव होना, नाक के भीतर, गले और तालु में खुजली होती है।
4.त्रिदोषज- उपर दिए गये तीनों दोषों के उत्पन्न होने से बार-बार नजला हो जाता है। इसमें तीनो दोषों के लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर में अत्यधिक पीड़ा होती है।
5. रक्तजन्य नजला – नाक से लाल रंग का स्राव का होना। आखों का लाल हो जाना, मुंह से बदबू आना, सीने में दर्द होना,गंध का ठीक तरह से पता नहीं चलना आदि लक्षण होते हैं।
6. दूषित नजला – नजला के सभी दोषों की अत्यंत वृद्धि हो जाने से बार-बार नाक बहना, सांसो में दुर्गंध आना, नाक का बार-बार बंद होना-खुलना, सुंगंध-दुर्गंध पता न चलना आदि लक्षण होते हैं।

नजला (njlaa cold)के प्रमुख कारण

नजला मस्तिष्क से सम्बन्धित रोग होते हुए भी इस रोग का मुख्य कारण है जठराग्नि का मंद हो जाना। जठराग्नि मंद होने से पाचन क्रिया बिगड़ जाती है जिससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता है और कब्ज हो जाने के कारण उपचय पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाते, जिसके कारण जुकाम की उत्पत्ति होती है क्योंकि शरीर में एकत्रित विजातीय तत्व जब अन्य रास्तों से बाहर नहीं निकल पाते, तो वे जुकाम के रूप में नाक से निकलने लगते हैं।

यह नजला-जुकाम बहुत पीड़ादायक होता है। इससे सिर, नाक, कान, गला तथा नेत्र के विकार उत्पन्न होने लगते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कारण हैं। खांसी,छींक,मल, मूत्र के अलावा शरीर के सभी वेगों को रोकना, धूल के कणों का नाक में घुसना,ज्यादा बोलना,गुस्सा अधिक करना, ज्यादा देर तक सोते रहना,शीतल जल और ठंडे पेय को अधिक पीना, अधिक मैथुन करना आदि से मस्तिष्क में कफ जम जाता है। साथ ही साथ मस्तिष्क की वायु की बढ़ जाती है। तब ये दोनों दोष मिल कर जुकाम उत्पन्न करते हैं। जुकाम को सामान्य रोग मानकर उसकी अनदेखी करना आपको तकलीफ में डाल सकता है

इसकी उपेक्षा से अन्य विकार भी पैदा होने लगते हैं। जुकाम बिगड़ने पर वह नजले का रूप धारण कर लेता है। नजला होने पर नाक से श्वास नहीं ले पाते है, बाहरी गंध का पता ही नहीं चलना,नाक का पक जाना, नाक से हमेशा पानी बहना,मुंह से बदबू आना आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं। और कहा जाता है कि नजले ने शरीर के जिस अंग में अपनी जगह बना ली,उसी अंग से हाथ धोना पड़ सकता है। दांतों में घुस गया, तो दांत गये, कान में गया, तो कान गये, आंखों में गया, तो आंखे गयी, छाती में जमा हो, तो दमा और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न कर देता है। सिर पर गया, तो बाल गये।

नजला जुखाम के बचाव –njlaa cold

सबसे पहले इस बीमारी को उत्पन्न करने वाले कारणों का पता लगाकर इनको दूर करें। कफ में वृद्धि करने वाले,मधुर ,ठंडे और भारी भोजन का सेवन नहीं करें। दिन में न सोये, ठंडी हवा का झोंका शरीर पर सीधे नहीं आने देना है, अत्यधिक मैथुन करने आदि से दूर रहें। जल्दी पचने वाला और गर्म और रुखे भोजन का सेवन करें। पचने में हल्का, गर्म और रूखा आहार लें। सोंठ के एक चम्मच को चार कप पानी में पका कर बनाया गया काढ़ा दिन में 3 -4 बार पीना है। आराम मिलेगा।

घरेलू उपचार –

1. अदरक और देशी घी- अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके देशी घी में भुन लें। फिर दिन में चार-पांच बार इसे चबाकर खा लें। इससे नजला-जुकाम ठीक हो जाएगा और रोगी को आराम मिलेगा।
2.हल्दी, अजवायन, पानी और गुड़- 10 ग्राम अजवाइन और 10 ग्राम हल्दी के चूर्ण को आधा कप पानी आंच पर पकाएं। जब पानी जलकर आधा रह जाये तो उसमें थोडा-सा गुड मिला लें। इसे छानकर दिन में तीन बार पीना है। इससे नजला दो दिन में ठीक हो जाएगा।
3. लहसुन, शहद और कलौंजी- लहसुन की दो पोथिया को आग में सेक कर पिस लें। फिर इस चूर्ण को शहद के साथ चाटें।कलौंजी का चूर्ण बनाकर एक कपड़े में बांध लें और इसे बार बार सूंघे इससे नाक से पानी आना बंद हो जाएगा।
4. तुलसी, लौंग, अदरक, सोंठ, गुड़,और कालीमिर्च-
तुलसी की पांच पत्तियां, दो लौंग, एक छोटी गांठ अदरक या सोंठ तथा चार कालीमिर्च – सबको मोटा पीसकर एक कप पानी में आंच पर चढ़ा दें। जब पानी जलकर आधा रह जाए तो छानकर उसमें जरा-सा गुड़ डालकर गरम-गरम पी जाएं।
5.सोंठ- एक चम्मच पिसी सोंठ की फंकी लगाकर ऊपर से गुनगुना पानी पी लें। धन्यवाद

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