पूरे शरीर की गंदगी (body toxin) एक ही दिन में कैसे निकाले – How To Remove All The Toxic From The Body In 1 Day.

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शरीर की गंदगी(body toxin) की सफाई -100 में से सिर्फ 5% लोग ही ऐसे है जो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते है।

बाकि बचे 95% लोग आज कब्ज और पेट में जमी गंदगी से होने वाली समस्याओ से ही जूझ रहे है और ये सारी देन है बदलती लाइफ स्टाइल की । कब्ज होना और गैस बनना ये समस्याएँ आजकल बहुत ही आम हो चुकी है।
पूरी दुनिया के प्रत्येक घर में ये समस्या आपको देखने को मिल जाएगी। कब एक कब्ज एक बवासीर का रूप लेकर शरीर में प्रकट हो जाए किसी को कुछ नही पता।
इस भागती हुई जिन्दगी में हम स्वास्थ्य को भूल चुके है। सबको जल्दी है किसी को ट्रेन पकडनी है तो किसी को बस, किसी को ऑफिस का काम पूरा करना है तो किसी को घर का, चारों तरफ सिर्फ दौड़ ही दौड़। पर इस दौड़ में हमने बहुत कुछ पीछे छोड़ा है और ये जीवन की सचाई है।

जिस शरीर से हम सब कुछ कार्य कर रहे होते है वो आखिर किसका शरीर है?

अगर वो शरीर हमारा है तो क्या हमे अपने शरीर की कार्य प्रणाली को नही जानना चाहिए ? क्या हमे ये नही जानना चाहिए कि हमारा भोजन कैसे पचता है? कैसे हमारे शरीर के अंग काम करते है? कौनसी शक्ति है जो इन सबको चला रही होती है?
जरा सोचिये, आज के इस पिछड़े हुए दौर में अगर हमे स्वस्थ रहना है तो हमे शरीर के बारे में थोडा-बहुत ज्ञान होना आवश्यक है। ये ज्ञान ही हमे बड़े रोगों से बचाएगा। भले ही किसी व्यक्ति के पास किसी रोग को ठीक करने के लिए लाखो रूपए न हो लेकिन अगर उसे ये ज्ञान है कि रोग शरीर में कैसे पनपते हैं और उसकी शुरुआत कहा से होती है तो मात्र इतना जान लेने से ही व्यक्ति बड़े और गंभीर रोगों से बचा रहता है।
आज आयुर्वेद के बारे में भले ही हम बहुत अच्छी-अच्छी बाते करके इस वातावरण में स्वस्थ रहने की कितनी भी कोशिश कर लें, पर कहीं न कहीं वो जहर वो गंदगी हमारे अन्दर जमा होती ही है। चाहे वो बाहर से आने वाली सब्जी हो या बाहर से आने आने वाला दूध, खाने वाला गेंहू हो या पीने वाला पानी। आखिर कितना बचोगे? गंद तो इकट्ठा होगी ही।
हमे बस ये प्रयास करते रहना है कि गंद हमारे शरीर में रुकने ना पाए। उसके लिए सप्ताह में 2 से 3 बार हमे उसकी सफाई अवश्य करनी चाहिए और आयुर्वेद में सफाई करने के बहुत से उपाय बताये गये है। कुछ उपाय किसी की देखरेख में करने पड़ते है तो कुछ स्वयं घर पर ही आसानी से किये जा सकते है।
अभी आपको एक अद्भुत उपाय बताया जा रहा है जिसकी मदद से आप भयंकर से भंयकर पेट में जमी हुई गंदगी को सिर्फ 3 प्रेशर से ही बाहर निकाल सकते है। तीसरे प्रेशर में पाखाने से पानी बाहर आता है जिससे ये पता चलता है कि गंदगी पूरी तरह से बाहर निकल गई है ।

ये उपाय हजारो लोगों पर आजमाया जा चुका है और कभी-भी इसका वार खाली नही जाता है।

वह उपाय है "त्रिफला योग", जिसे बनाना और इस्तेमाल करना आपको आना चाहिए। ज्यादातर लोग इसका पूर्ण लाभ नही ले पाते है क्योंकि आयुर्वेद में हर चीज को खाने का एक तरीका होता है। यानि उसके प्रोटोकॉल के हिसाब से अगर उसे खाया जायेगा तो वो पूर्ण लाभ देगी अन्यथा नही।
दवा एक है मगर उसे अलग-अलग समय पर खाने से दवा अलग-अलग असर दिखाएगी। जैसे खाली पेट खाने से अलग असर, खाना खाने के तुरंत बाद खाने से अलग असर और खाने के एक घंटे बाद खाने से दवा अपना अलग-अलग असर शरीर में दिखाएगी।
त्रिफला से आज हर कोई वाकिफ है पर ज्यादातर लोग ये नही जानते की त्रिफला को कौनसे अनुपात में बनाया जाए और किस तरह से इसका सेवन किया जाए । अलग-अलग अनुपात में बना त्रिफला अलग-अलग असर शरीर में दिख़ाता है। जैसे रेडिएशन जैसी गंभीर बीमारी में 1:1:1 अनुपात वाला यानि समान मात्रा वाला त्रिफला असर करता है।
पेट की गंद को साफ़ करने के लिए 1:2:3 और 1:2:4 अनुपात वाला बना त्रिफला बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है।
1:2:4 अनुपात यानि हरड 100 ग्राम, बहेडा 200 ग्राम और आंवला 400 ग्राम होता है।
इसी अनुपात में इसे बनाकर सुबह खाली पेट इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस त्रिफला को आप घर पर भी बना सकते है पर डाली जाने वाली सामग्री शुद्ध और सही होनी चाहिए। इस त्रिफला को बनाने में आपका समय खर्च ना हो उसके लिए हमने स्वयं इस त्रिफला अमृत को तैयार किया है ताकि इस मिलावट वाले दौर में हम इस टूल का इस्तेमाल करके समय-समय पर अपने पेट की सफाई कर सकें।
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और अगर आप इसे घर पर ही शुद्ध तरीके तैयार करना चाहते हैं तो उसका अलग विडियो हमने बना रखा है।
नीचे दिए गए विडियो को देख कर आप त्रिफला को घर पर आसानी से बना सकते हैं। 
हमारे कई सब्सक्राइबर मित्र तो इसका इस्तेमाल करके आनंद भी ले चुके है। जिस भी मित्र ने इसका इस्तेमाल किया हो वो नीचे कमेंट जरुर करे।
दोस्तों त्रिफला को लोग इसके स्वाद के चलते इसे खाना पसंद नही करते। खाने में भले ही ये थोड़ी कडवी जरुर लगती है मगर इसके फायदे इतने है की यहाँ पर बता पाना संभव नही है। यदि थोड़ी देर ये कड़वी लगती है तो लगने दो, हम मर नही जायेंगे उसे खाने से। बल्कि यह तो मौत के मुंह में जाने से रोकती है।
तीन प्रेशर लाने के लिए आप त्रिफला को सुबह के समय सेवन करें। हल्का गुनगुना लगभग 2 गिलास पानी लें और त्रिफला की 1 से 2 चम्मच मुंह में फांकी मारकर होठों से गिलास को लगाकर पानी मुंह में इकट्ठा करके गर्दन इधर-उधर हिलाएं।
फिर स्वाद न लेते हुए तुरंत उसे पी जाएं, कड़वेपन पर ध्यान नही देना है। आप उस समय सिर्फ ये सोचें कि चाहे कुछ भी हो जाए मुझे इसे लेना है क्योंकि ये मुझे आने वाले रोगों से बचाएगी।
त्रिफला लेने का दूसरा तरीका:- एक गिलास पानी लें उसमे 1 से 2 चम्मच त्रिफला-अमृत की मिलाये और रात भर गिलास को ढककर रख दें। सुबह होने पर गिलास में पड़े पानी को छलनी की सहायता से छान ले और हल्का गुनगुना करके पी जाएं।
ये त्रिफला जैसे ही पेट में जाएगी अपना काम शुरू कर देगी। इसे लेते ही एक ही दिन में इसका असर आता है पर कुछ मामलों में गंदगी अधिक होने की वजह से या जिनके शरीर में वात दोष की अधिकता होती है तो उन्हें पहले ही दिन 3 प्रेशर नही आते, लेकिन अगले दिन बादलों की गडगडाहट के जैसे गंदगी को बाहर आना ही पड़ता है।
पहले प्रेशर के बाद 2 प्रेशर और आते है, उन 2 प्रेशर को लाने के लिए आपको हर प्रेशर के तुरंत बाद लगभग 2 गिलास गुनगुना पानी पीना पड़ता है। पहले प्रेशर में मोटा-मोटा मल, दूसरे प्रेशर में पतला मल और तीसरे प्रेशर में पानी-पानी शरीर से बाहर निकलता है। बस सप्ताह में 2 से 3 बार इसका सेवन करो और मस्त रहो।
ध्यान रहे कि हर दिन फ्रेश होने के बाद पेट में जाने वाले पहले भोजन में 1 कटोरी मूंग की खिचड़ी में 1 चम्मच देशी गाय का शुद्ध घी मिलाकर खाएं। यह खाना अनिवार्य है क्योंकि त्रिफला खाने से पेट में जो खुश्की पैदा होती है उसे दूर करने और आँतों में चिकनाहट बनाए रखने के लिये मूंग की खिचड़ी में घी मिलाकर खाना आवश्यक है।
इसके आलावा पूरे शरीर का कायाकल्प करने के लिए त्रिफला को 40 दिन तक खाने का योग भी आयुर्वेद में बताया गया है जिससे शरीर की सप्त-धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र पूर्ण रूप से शुद्ध बनती है।
ऋषि वाग्भट्ट ने तो इसी त्रिफला पर 250 सूत्र लिखे है कि त्रिफला को इसके साथ खायेंगे तो क्या होगा, त्रिफला को उसके साथ खायेंगे तो क्या होगा। हरड, बहेड़ा और आंवला मिले होने की वजह से कई जगह हमारे ऋषियों ने इसे (ब्रम्हा, विष्णु और महेश) की उपाधि भी दी है। क्योकि ये हमारे शरीर के वात-पित्त-कफ को संतुलित रखता है जिसकी वजह से इम्यून पावर हमेशा बढ़ा रहता है।
हर व्यक्ति के लिए ये जानकारी बहुत ही लाभप्रद है। इसे शेयर करके लोगो तक जरुर पहुचाये ।

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