वीर्य (Semen) बनने की प्रक्रिया है बहुत लम्बी। इसे ऐसे ही बर्बाद न करें।

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आज हम आपके लिए एक महत्वपूर्ण विषय लेकर आये है, वीर्य (Semen) की बर्बादी और इस बीमारी से सम्बंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

दोस्तों क्या आपको पता है कि जो वीर्य (Semen) आप हस्तमैथुन और स्वप्न दोष के जरिये बाहर निकाल देते हो उसे बनने में कितना समय लगता है और हमे कितना भोजन करना पड़ता है तब जाकर 20 ग्राम वीर्य (Semen) बनता है।

आधुनिक वैज्ञनिक भी कहते हैं कि, लगभग 32 किलोग्राम भोजन से, 700 ग्राम रक्त बनता है और 700 ग्राम रक्त से, लगभग 20 ग्राम वीर्य (संक्राणु) (Healthy Semen) बनता है बशर्ते कि अगर शरीर स्वस्थ हो तो।

दोस्तों प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर केलाग का कहना हैं कि – “मेरी सम्मति में मानव-समाज को प्लेग, चेचक तथा इस प्रकार की अन्य व्याधियों एवं युद्ध से इतनी हानि नहीं पहुँचती जितनी हस्तमैथुन तथा इस प्रकार के अन्य घृणित महापातकों से पहुँचती है।

कम उम्र मे TV पर बताए गए अश्लील द्रश्यों को देखकर बच्चो का ध्यान कामवासना की तरफ़ जाता है। जिससे बच्चे कामक्रिडा मे लग जाते है। ज्यादातर रिसर्च मे यह बताया गया है कि बच्चे हस्तमैथुन मे ज्यादा और जल्द लग जाते है क्योंकि इस क्रिया मे किसी और की आवश्यक्ता नहीं होती।

बच्चे अपने हाथों से ही अपने लिंग का प्रयोग करके वीर्यपात करते है और यह उनकी आदत बन जाती है। स्टडीज मे यह पता चला है कि कुछ बच्चे बहुत कम उम्र (13-16) साल मे ही दिन मे करिब तीन बार तक हस्तमैथुन करते है।

दोस्तों हस्तमैथुन नौजवानो की नस्ल को बर्बाद कर देता है। उनकी शारिरिक एवं मानसिक शक्ति वीर्यपात के जरिए खत्म कर देता है। वह एक जिंदा लाश बनकर रह जाते है। इसी वजह से घर मे नौजवान ज्यादा भारी शारीरिक और मानसिक काम करने मे असमर्थ हो जाते है।

वह अपनी शादीशुदा जिन्दगी मे भी पत्नी को खुश नही रख सकते। इस वजह से घर मे हर दम तनाव बना रहता है और घर का चैन व सुकुन बर्बाद हो जाता है।

हस्त मैथुन की गन्दी आदत से मात्र कुछ मिनटों में अपने बेशकीमती धातु अर्थात वीर्य (Semen) को बर्बाद करने वाले अधिकाँश युवक समझ नहीं पातें है कि खाए गए भोजन से वीर्य (Semen) बनने की प्रक्रिया कितनी ज्यादा लम्बी, जटिल और दुरूह है।

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श्री आचार्य सुश्रुत ने इस बारे में लिखा है कि –

रसाद्रक्तं ततो मांसं मांसान्मेदः प्रजायते ! मेदस्यास्थिः ततो मज्जा मज्जाया: शुक्रसंभवः !!

अर्थात – भोजन पच कर पहले रस बनता है फिर पाँच दिन में उस रस से रक्त बनता है फिर उसके पाँच दिन बाद रक्त में से मांस, फिर उसके पांच – पांच दिन के अंतर पर मेद, फिर मेद से हड्डी, फिर हड्डी से मज्जा और मज्जा से अंत में वीर्य (Semen) बनता है । स्त्री में जो यह धातु बनती है उसे ‘रज’ कहते हैं । इस प्रकार वीर्य (Semen) बनने में करीब 30 दिन 4 घण्टे लग जाते हैं ।

दोस्तों वीर्य (Semen) की मनमाने तरीके से बर्बादी करने वालों को समझना चाहिए कि आखिर ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ है क्या ?

ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ है सभी इन्द्रियों पर काबू पाना जिसके बारे में एक रोचक सत्य प्रसंग है –

एक बार स्वामी दयानंद सरस्वती से किसी ने पूछा कि आपको कामदेव सताता है या नहीं ? तो उन्होंने उत्तर दिया हाँ वह आता तो है मेरे पास भी, परन्तु उसे मेरे मकान (अर्थात मन) के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी भी खाली ही नहीं पाता है।

दोस्तों स्वामी दयानंद सरस्वती कई तरह के सेवा कार्यों में इतने ज्यादा व्यस्त रहते थे कि उन्हें इन सब बातों के बारे में सोचने तक की फुर्सत नहीं थी। यही था उनके ब्रह्मचर्य का रहस्य।

वास्तव में विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) जैसी संस्थाएं चेचक, पोलियो, टी.बी., मलेरिया, प्लेग आदि संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए हर साल करोड़ों डॉलर खर्च करती है परन्तु इन सबसे ज्यादा हानिकर रोग है वीर्यह्रास (Wastage of semen) । हा दोस्तों, और निश्चित रूप से इसकी गंभीरता को हर बुद्धिमान व्यक्ति जरूर समझता है।

हस्त मैथुन की गन्दी आदत या स्वप्न दोष की बीमारी का इलाज जानने से पहले यह अच्छे से जानने की जरूरत है कि आखिर जरूरत क्या है इन समस्याओं से पीछा छुडाने की।

दोस्तों हस्त मैथुन या स्वप्न दोष दोनों समस्याओं से वीर्य (Semen) या रज का अप्राकृतिक रूप से नाश होता है। वीर्य (Semen) या रज के नाश से होने वाले नुकसान को ठीक से समझने से पहले यह समझने की जरूरत है कि ब्रह्मचर्य के क्या महान फायदें हैं।

वास्तव में सारी दुनिया एक तरफ और एक ब्रह्मचारी का तेज दूसरी तरफ।

ब्रह्मचर्य (celibacy, celibate, continence) में इतना प्रचंड तेज होता है कि उसकी तुलना दुनिया का बड़ा से बड़ा हथियार भी नहीं कर सकता है। जिसका एक प्रसिद्ध उदाहरण थे श्री भीष्म पितामह जिनका सामना करने की ताकत पांडवों में किसी में भी नहीं थी। इसलिए श्री कृष्ण को अर्जुन को भेजना पड़ा स्वयं भीष्म पितामह के पास यह जानने के लिए, की आखिर वो मरेंगे कैसे ?

दोस्तों केवल शादी ना करने से ही कोई पूर्ण ब्रह्मचारी नहीं हो जाता है। बल्कि इसके लिए कुछ कठिन योग साधनाएं करनी पड़ती है। जैसे शक्तिचालिनी मुद्रा, कपालभाति, सिद्धासन आदि का बेहद लम्बा अभ्यास करना पड़ता है जिससे वीर्य (Semen) की उर्ध्व गति (उर्ध्व रेतस) होती है और मानव धीरे धीरे महामानव में तब्दील होने लगता है।

तो दोस्तों अब जानते है ब्रह्मचर्य करने (Semen Retention) के फायदे और ब्रह्मचर्य न अपनाने के नुकसान –

– वीर्य (Semen) के अत्यधिक ह्रास से शरीर की जीवनी शक्ति घट जाती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, आँखो की रोशनी कम हो जाती है, शारीरिक एवं मानसिक बल कमजोर हो जाता है, स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है और हाथ पैर कापने लगते है।

– साधना द्वारा जो साधक अपने वीर्य (Semen) को ऊर्ध्वगामी बनाकर, उर्ध्वरेता होकर योग साधना (Yoga Sadhna) में आगे बढ़ते हैं वे अनेक दिव्य सिद्धियों (Riddhi Siddhi) के मालिक बन जाते हैं। ऐसा ऊर्ध्वरेता पुरुष निश्चित रूप से भगवान का दर्शन प्राप्त कर सकतें है।

– ऑक्सीजन प्राणवायु है तो वीर्य (Semen) जीवनी शक्ति है। अतः जिस तरह जीने के लिये ऑक्सीजन चाहिए वैसे ही ‘निरोग’ रहने के लिये स्वस्थ शुक्राणु। वीर्य (Semen) इस शरीर रूपी नगर का राजा ही है। यह वीर्य (Semen) रूपी राजा यदि पुष्ट हो अर्थात बलवान हो तो रोग रूपी शत्रु, शरीर रूपी नगर पर कभी आक्रमण नहीं कर पाते हैं।

– शास्त्रों में इस तथ्य के समर्थन में कहा गया है (Precious knowledge of Ancient most Hindu religious books Shastra or Granthas) –

आयुस्तेजोबलं वीर्य प्रज्ञाश्रीश्च महद्यशः। पुण्यं च प्रीतिमत्वं च हन्यतेऽब्रह्मचर्यया॥

अर्थात – आयु, तेज, बल, वीर्य, बुद्धि, लक्ष्मी, कीर्ति, पुण्य, प्रीति आदि सभी विभूतियाँ ब्रह्मचर्य न पालने पर पलायन कर जाती हैं।

दोस्तों जो लोग कम उम्र में ही वीर्येपात करते है उनका वीर्य पतला हो जाता है, जिसके कारण स्वप्नदोष की बीमारी लग जाती है।

1) उनके हाथ पैर बारिक हो जाते है, आंखे अन्दर धस जाती है, गाल पीचक जाते है.

2) हर वक्त कमजोरि लगती है, व्यक्ती चीडचीडा हो जाता है, मानसीक रोगी बन जाता है.

3) हर वक्त वह अपनी ही परेशानी मे रहता है, अकेलापन उसे अच्छा लगता है, उसके हौसले पस्त हो जाते है। चार लोगो मे जाने से शरमाता है।

4) ज्यादा शारिरिक या मानसिक श्रम के काम वह व्यक्ति नहीं कर पाता।

5) उसकी प्रतिकार शक्ति बहुत कम हो जाती है इसी वजह से हर दम बीमार रहता है।

6) विद्यार्थीयो की मानसिक ताकत एवं यादाश्त बहुत कमजोर हो जाती है. इस तरह वह अपने एक्ज़ाम मे भी असफ़ल होते है या बहोत कम नम्बर से पास होते है।

7) उनके बाल वक्त के पहले हि सफ़ेद हो जाते है और झडने लगता है।

8) आंखे वक्त के पहले हि  कमजोर हो जाती है।

9) शरीर मे खुन कम हो जाता है।

10) पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है, खाना कम चलता है, हमेशा गैस, अपचन की तकलीफ़ रहती है।

11) थोडे से काम से ही व्यक्ति बहुत थक जाता है।

12) हर वक्त कमर मे दर्द और शरीर मे थकावट रहती है।

13) ऐसे व्यक्ती की शादीशुदा जिन्दगी  भी कुछ खास अच्छी नही रहती।

14) उस व्यक्ति की सोच हर वक्त कामुक और गन्दी रहती है.वह हर लडकी की तरफ़ कामुक विचारो से सोचता है।

15) उसकी जिन्दगी दुनिया मे ही नर्क बन जाती है।

16) ऐसे हि कितने ही हसते खेलते घर इस बुरी आदत से उजड जाते है।

तो दोस्तों आप अपने वीर्य को ऐसे ही बर्बाद न करे। जो लोग हस्तमैथुन करते है उन्हें अपने आप को देखना चाहिए और उन्हें अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए कि आखिर ऐसा करने से क्या होगा भला। आप उसके अंत में जाइए और देखिये सोचिये कि आप जो यह कर रहे है इससे आपको क्या लाभ मिलने वाला है।

जब आप ये देखने लग जायेंगे तो आप संकल्प लेकर संकल्प शक्ति के साथ किसी भी व्यसन से बाहर आ सकते है क्योकि महर्षि वाग्भट जी ने यह कहा है कि अगर किसी भी व्यसन से बाहर निकलना है तो आप संकल्प शक्ति के द्वारा किसी भी व्यसन से बाहर निकल सकते हो।

दोस्तों हम आपसे विनती करते है कि यह मनहूस और गन्दा काम छोड़ दे जो आप को बर्बाद कर देगा। अगर आप इसे छोड़ने में असमर्थ है तो आप हमे इस लेख के नीचे कमेंट करिए। हम इस व्यसन को छुड़ाने में आपकी पूरी मदद करेंगे। हम आपके लिए इस विषय पर एक और लेख लिखेंगे जिसमे हम इस व्यसन को छुड़ाने के बारे में बात करेंगे।

दोस्तों आप जितने जल्दी और ज्यादा कमेंट करेंगे तो उतनी ही जल्दी हम आपके लिए दूसरा लेख लिख देंगे जिससे आपकी यह आदत छूट जाएगी।

अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो आप इस लेख को जरुर शेयर कर दीजिये ताकि सब लोगो तक यह जानकारी पहुँच सके और वो अपना उपचार स्वयं कर सके। धन्यवाद !

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