वजन संतुलित रखने वाले 5 प्राकृतिक आहार (Five diet to keep weight balanced)

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वजन संतुलित रखने वाले पांच आहार (Five diet to keep weight balanced) विश्व भर में चिकित्सा विज्ञान ने जो वजन के मापदंड निर्धारित किए हैं। ये स्वस्थ लोगों के लिए नहीं हैं।

विश्व भर में चिकित्सा विज्ञान ने जो वजन के मापदंड निर्धारित किए हैं। ये स्वस्थ लोगों के लिए नहीं हैं, न सिर्फ वजन बल्कि नाड़ीस्पंदन रक्तचाप भी रोगी लोगों के हैं,स्वस्थ व्यक्ति के लिए नहीं। स्वस्थ व्यक्ति का असली स्वास्थ्य ही असली वजन का निर्णायक हैं ये भ्रामक,झूठे निर्धारित वजन के मापदंड हमारा दिमाग खराब कर देते हैं। और उत्तम स्वास्थ्य अनुभव करने के बावजूद भी हमें ये मापदंड दु:खी करते रहते हैं।

अधिक खाकर हम अधिक वजन बढ़ाने की कोशिश करते हैं,और उल्टे रोगी और अशक्त हो जाते हैं। (विश्व की 80 प्रतिशत जनता बिना भूख के समय से खाने वाली और अतिआहार की शिकार हैं। इनका वजन सही कैसे हो सकता हैं?) वजन की चिंता ही रोगकारक चिंता हैं एक निरर्थक प्रयास हैं सारी चिंता सारा प्रयास स्वास्थ्य पाने के लिए होना चाहिए (प्राकृतिक नियम,आहार और जीवन अपना कर)।

लोग क्या कहेंगे-
हमारे वजन गिरने का सारा दुःख लोग क्या कहते है और क्या कहेंगे इस पर आधारित हैं। पके अनाज, माँसाहार, दूध खाने वाले रोगी लोग जब हमारे गिरते हुए वजन को देखते हैं तो अपने रोगकारक खोखले वजन से हमारी तुलना करते हैं। और ताने कसते हैं। अरे आप कमजोर हो गए हो आपको क्या रोग लग गया हैं ? वगैरह वगैरह ! इनमें इनका कोई दोष नहीं हैं क्योंकि जब तक इनकी अपनी रोगकारक धारणा सही नहीं होती, ये रोगकारक मापदंड़ो से ही हमें मापेंगे। ये हमारी तुलना रोगी भीड़ से करते हैं। इनकी धारणा में स्वास्थ्य वजन नहीं वजन स्वास्थ्य हैं इसलिये जब किसी व्यक्ति की चर्बी अधिक बढ़ने लगती हैं तो हम सभी यूँ नहीं कहते कि आप रोगी हो रहे हो बल्कि तारीफ कहते हुए कहते हैं कि आप आजकल काफी हेल्थी नजर आ रहे हो ! लोग हमारे स्वास्थ्य के निर्णायक न हैं न कभी हो सकते हैं इनके तानों पर भुलकर भी गौर नहीं करना चाहिए। बल्कि हमें इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि हम प्रकृति के नियमानुसार आहार-विहार कर रहे हैं।

पका हुआ अनाज छोड़ते ही हमारे शरीर में बहुत सारे परिवर्तन आते हैं। अनाज की पुरानी इकटठी अम्लता और गंदगी शरीर निकालने की कोशिश करता हैं। जब तक बोझरुपी पुरानी गंदगी से शरीर मुक्त नहीं होता तब तक अच्छी, कड़क भूख लगने नहीं देता। सीमित प्राकृतिक आहार ही लेना होता हैं इसलिए वजन भी गिरा हुआ रहता हैं। जैसे-जैसे हम गंदगी से मुक्त होते रहते हैं हमारी भूख भी धीरे-धीरे खुलती चली जाती हैं। भूख खुलते ही शरीर में अविशवसनीय स्फूर्ति, हल्कापन, गहरी नींद इत्यादि धीरे-धीरे प्रबल होते चले जाते हैं।

पुरानी गंदगी निकलने में कई दिन, कई बार कई महीने तक लग जाते हैं। ये हमारी दृढता और नियमितता पर आधारित होता हैं। गंदगी का बोझ काफी हद तक निकलने के बाद ही कड़क भूख खुलने के बाद ही स्वास्थ्य,स्फूर्ति और वजन की वृद्धि होती हैं, तब तक वजन नहीं बढ़ता। इसलिए खूब धैर्य, समझ और दृढ़ता के साथ इस सच्चाई को समझते हुए वजन के गिरने की चिंता बिलकुल नहीं करनी चाहिए। न इस बात की ही चिंता करनी चाहिए कि गंदगी कब तक निकलेगी, भूख कितने दिनों के बाद खुलेगी ? गंदगी जितनी भी होगी, अनाज बंद होते ही निकलेगी और जब तक निकल नहीं जायेगी, अच्छी भूख और अच्छा स्वास्थ्य कभी अनुभव नहीं होगा।

इसमें तकलीफ केवल इतनी ही होती है कि अच्छी भूख न खुलने के कारण और गंदगी रक्त में आकर बाहर निकलने के कारण शरीर में थोड़ी बैचेनी इत्यादि अनुभव होती रहती हैं। कभी गायब हो जाती हैं कभी आ जाती हैं। पूरी ताकत अनुभव नहीं होती। यह परिवर्तन-काल हैं, गंदगी का निकलना भी अत्यंत आवश्यक हैं इसलिए वजन का गिरना भी अनुचित नहीं हैं। इस परिवर्तन काल का भी आना जरूरी हैं और इसके बाद ही प्राकृतिक आहार पर रहने के असली फायदे, असली वजन, असली स्वास्थ्य की ऊचाइयों के धीरे-धीरे दर्शन होते हैं। पके हुए अनाज, दूध, माँसाहार के स्वास्थ्य घातक प्रभाव और खोखलें वजन की सत्यता भी तभी अनुभव होती हैं और सिद्ध होती हैं।

प्राकृतिक आहार से वजन वृद्धि के अनुभव –Five-diet-to-keep-weight-balanced

सामान्य आदमी की तो बात दूर प्राकृतिक चिकित्सकों को भी अभी तक ये विशवास और अनुभव नहीं है कि प्राकृतिक आहार से भी अच्छा वजन बढ़ता हैं। एक 20 साल के युवा ने पेट के असहनीय दर्द के कारण दवाइओं से अपनी सेहत खराब कर ली, और उसका वजन घट कर 38 हो गया उस ने 2 महीने फलों के रस और फलों से 6 किलों वजन बढाया। और वजन बढ़ने के साथ पुरानी बिमारी भी जड़ से खत्म हो गई।

एक और अनुभव की बात हैं एक लड़की 26 साल की पेट के पुरानी पेचिश और पेट के अल्सर पुराना कब्ज पेट का असहनीय दर्द सारे रोगों से पीड़ित थी दर्द के कारण उसकी भूख अच्छी तरह न खुल पाने के कारण वजन घटते-घटते 33 किलों तक पहुँच गया। धेर्य टूटने के पहले ही लड़की की भूख प्राकृतिक आहारों से अपने आप ही खुल गई और इस लडकी ने प्राकृतिक आहारों पर रहकर बिना अनाज के 3 महीनों में 14 किलो वजन प्राप्त किया अब उसका वजन 47 से 50 के बीच रहता हैं।

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