विदेशी दवाएं, चाय और समुद्री नमक (Foreign medicines, tea and sea salt) को फैलाने का भारत में व्यापारिक षडयंत्र

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विदेशी दवाएं, चाय और समुद्री नमक (Foreign medicines, tea and sea salt) को फैलाने का भारत में व्यापारिक षडयंत्र दोस्तों आपको हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि इल्लुमिनाति (एक गुप्त रहस्यमयी संगठन) अपने पैर जमाने और योजना को फलीभूत करने के लिये 100 वर्षीय 200 वर्षीय योजना बनाता है

और योजना को प्रशस्त करने के लिये देश के प्रमुख व्यक्तियों,राजनेताओं,कानूनों की सहायता लेता है। तो भारत देश में विदेशी दवाएं, चाय और समुद्री नमक, इन तीनों को लगभग एक ही समय में इस संगठन के एजेन्ट्स अंग्रेजो ने भारत में स्थापित किया था और शुरुआत आदत डलवाने से की। जैसे सन 1947 के पहले अंग्रेजो ने कांग्रेस की रैलियों, धार्मिक अनुष्ठानों और जुलूसों में खूब मुफ्त चाय बांटी जाती थी ताकि लोगों को इसकी आदत पड़ जाएँ ऐसा करने से जब लोगों को आदत पड़ गई तो इन लोगों ने इसे बेचना शुरू कर दिया गया फिर जब ये चाय बिकने लगी और व्यापार का एक नया क्षेत्र इल्लु को मिल गया।

कुछ ऐसा ही मिलता जुलता षडयंत्र नमक में किया गया जैसा कि भारत में प्राचीन काल से ही सेंधा नमक भोजन में प्रयोग किया जाता रहा है आयुर्वेद के आचार्यो ने हर खाद्य पदार्थ, हर औषधि पदार्थ या वनस्पति के लाभदायक गुणों का वर्णन निघंटु ग्रंथो में किया है। आयुर्वेद में सेंधा नमक को पेट के रोग दूर रखने वाला, शरीर में सूक्ष्म रासायनिक तत्वो की पूर्ति करने वाला बताया गया है जिससे अज्ञात रोग (लकवा, बीपी,बेचैनी, घबराहट, हड्डियों की कमजोरी) उत्पन्न नही हो पाती। तो फिर इन इल्लु एजेंटों ने भारतीयों के खानपान को देखा और भारत की भोली-भाली जनता को बीमार करके विदेशी दवाओं के व्यापार लिये योजना बनाई।

जिसमे चाय, नमक, शराब को हर घर तक भिजवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। चाय को मुफ्त बाटकर आदत डलवा दी गयी। शराब को हर घर तक पहुचाने के लिये 1947 के बाद सरकार ने खुद जिम्मेदारी ली और सरकारी ठेका दुकान खुलनी आरम्भ हुई। और समुद्री प्राणियों के अवशेष से बनने वाले समुद्री नमक को शुद्ध सनातनी हिन्दू परिवार कभी उपयोग ही नहीं करता था तो उस परिवार में ये नमक घुसा पाना बहुत कठिन कार्य हो गया। अब समुद्री मांसाहारी नमक को हिन्दुओ के घर मे घुसाने का कार्य तभी सफल हो पाता जब कोई हिन्दुओ का प्रसिद्ध व्यक्ति इस कार्य को प्रचारित करे।

तो समुद्री नमक को लोकप्रिय करने के लिए महात्मा गांधी को इल्लु ने माध्यम बनाया। इसी कार्य को सफल बनाने के लिए 12 मार्च सन 1930 में गांधी ने एक आंदोलन किया जिसको नमक विरोधी कानून तोड़ो के नाम से इतिहास में पढ़ाया जाता है। और आंदोलन की कहानी बताई गई कि गांधी जी ने अंग्रेजो के द्वारा लगाए गए नमक कर का विरोध किया है। समुद्री नमक को गांधी के समय तक एक साधारण हिन्दू परिवार छूता तक नहीं था क्योंकि ये समुद्री प्राणियों के अवशेष से उत्पन्न माना जाता था इसलिये आज भी किराना दुकान में समुद्री नमक के बोरो को दुकान के बाहर आहार की वस्तुओं से दूर ही रखा जाता था और चोर तक इस नमक के बोरो को आज भी हाथ नही लगाते।

ये केवल पशुओं को कभी कभी औषधि के रूप में दिया जाता था मुँह से बांस की नली में डालकर तो जो नमक एक आम हिन्दू के लिये धूल के समान था, कचरे के बराबर था अछूत था।उस नमक को बनाने पर अंग्रेजो ने पाबंदी लगा दी पर इस पाबंदी का क्या अर्थ? जो चीज हिन्दुओ में उपयोग हेतु हजारो साल से ही वर्जित थी उपयोग ना के बराबर होती थी उस पर कानून बनाकर पाबंदी लगाने का कोई महत्त्व ही नही था लेकिन इल्लु एजेन्ट्स अंग्रेजो ने कानून बनाया और फिर मोहनदास गांधी जिनको सनातन धर्म का कोई ज्ञान ही नहीं था।

वो इस नमक कानून के विरोध में दांडी यात्रा निकाले और हर भारतीय से कहा कि हम सब अंग्रेजो का विरोध करते है इसलिये हम समुद्री नमक घर घर बनाएंगे, खाएंगे,कोई इस पर पाबंदी नही लगा सकता जबकि समुद्री नमक किसी हिन्दू के घर में उपयोग होता ही नही था। तो राष्ट्रभक्ति आंदोलन की आड़ में, लाखो कांग्रेसियो ने हिंदुओ के हर घर तक इस घातक समुद्री नमक को पहुचा दिया और अंग्रेजो की छद्म गुप्त नीति पर आधारित आरम्भ नमक आंदोलन का उद्देश्य सफल हुआ। परिणामस्वरूप रोग नाशक सेंधा नमक हर हिन्दू के घर से बाहर हो गया और घातक समुद्री नमक घर घर पहुंच गया और फिर इस नमक आंदोलन के अगले कदम के रूप में गांधी के लोगो ने ही आयोडीन नमक को देश में अनिवार्य कर दिया।

आज हर घर में रक्त दोष,पाचन विकार,बीपी,शुगर के रोगी पैदा हो रहे हैं और ढेले वाले समुद्री नमक घर घर चल रहा है। आज आप जिस समुद्री नमक को खा रहे हैं वो कितना घातक बनाया जा चुका है। उसे जानने के लिए उस नमक के पैकेट को ध्यान से देखिये यदि उस पर क्रिस्टल मोडिफायर (Crystal Modifier) या E-536 लिखा हुआ है। तो इसका मतलब नमक में पोटेशियम फेरो साइनाइड मिला हुआ है जिसके एक केमिकल अणु में साइनाइड के 6 परमाणु है जिसका केमिकल फार्मूला (K4Fe(CN)6) है। यद्यपि यह अल्प मात्रा में होता है जैसे ही यह हमारे पेट में पहुँचता है पेट में उपस्थित पाचक अम्ल से रिएक्ट करके पोटेशियम और फेरोसाईनाइड के पोसिटिव और नेगेटिव आयन बनाता है। और फेरोसाइनाइड पेट में उत्पन्न HCl से रिएक्ट करके फेरस क्लोराइड और हाइड्रोजन साइनाइड बनाता है जो की हद से ज्यादा जहरीला विष है इस विष को डीटाक्सीफाई या प्रभावहीन बनाने के लिए लिवर पर अत्यधिक दबाव पडता है। प्रतिदिन इस नमक के साथ सायनाइड के धीमे जहर मिले हुए नमक खाने से कुछ महीनो या वर्षो में आप मृत्यु के निकट पहुँच जाएंगे।

ये इल्लु की एक तीर से दो निशाने वाली रणनीति है जिसमे नमक जैसी साधारण चीज बेचकर खरबो रूपये हर साल कमाते जा रही है और लाखों हिन्दुओ को बीमार करके मारती भी जा रही है। ठीक इसी तरह पानी की बोतल को भारत में व्यापार की वस्तु बना दिया गया है। तो दोस्तों ये है इल्लुमिनाती के कार्य करने की पद्धति और दीर्घकालिक योजना। जो कि कभी असफल नही हुई आजतक भारत में बल्कि वो विदेशी दवाओं के माध्यम से जहर देने में सफल हो रहे हैं। धन्यवाद

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