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काली खांसी (Hooping cough) को करें जड़ से खत्म

Hooping-cough

काली खांसी (Hooping cough) को करें जड़ से खत्म बदलते मौसम और हल्के सर्दी-जुकाम के साथ खांसी होना आम बात है, परन्तु कई बार खांसी लगातार चलती रहती है और लंबे समय तक चलती रहती है।

अगर खांसते समय आपको सांस लेने में तकलीफ हो और साथ में अजीब-सी आवाज आने लगे, तो ये काली खांसी के लक्षण हो सकते हैं। काली खांसी एक साँस से संबंधित बीमारी है। ऐसा कहा जाता है यह बीमारी सिर्फ बच्चों में ही होती है परन्तु ऐसा नही है यह बीमारी बड़े-बूढों सभी को हो जाती है। यह एक खतरनाक और संक्रामक बीमारी होती है मतलब इस बीमारी के वायरस एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक हवा के जरिये से पहुंच जाते है और यह बीमारी तेजी से फैल जाती है। यह खांसी रात को अधिक बढ़ जाती है। कई बार खांसते-खांसते व्यक्ति की साँस भी फूलने लगती है। चेहरा भी लाल हो जाता हैं। इस खांसी को कुक्कुर खांसी भी कहते हैं। खांसी शुरू होने के लगभग 2 सप्ताह तक संक्रमित लोग सबसे ज्यादा संक्रामक होते है। काली खांसी से प्रभावित व्यक्ति को खांसते समय कफ (बलगम) आता है। यह बीमारी आपको 3 से 6 हफ़्तों तक तक अधिक परेशान कर सकती है। यह अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है। यह बोर्डटेला पर्टुसिसि बैक्टीरिया के कारण काली खांसी होती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने एंव छीकने से इसके बैक्टीरिया वातावरण में फैल जाते हैं, यदि आप उस वातावरण में सांस लेते हैं या फिर किसी कारणवश इसके संक्रमण में आ जाते हैं तो यह जीवाणु आपके फेफड़ों में जाकर संक्रमण को फैला देते हैं। ये खांसी श्वांस नलिका में जकड़न के कारण हो जाती है। यह समस्या ज्यादातर छोटे बच्चों को श्वसन प्रणाली को प्रभावित करती है। काली खांसी को कुकुर खांसी के नाम से इसलिए जाना जाता है, क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खांसते समय कुत्ते की भौंकने वाली आवाज आती है। काली खांसी अक्सर कमजोर इम्युनिटी वाले लोगो अधिक होती है। काली खांसी से पीड़ित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो छोटे-छोटे बैक्टीरियों से भरी बूंदे हवा में फैल जाती हैं। जिससे यह बैक्टीरिया हवा के जरिये रोगी के आस पास बैठे लोगों की सांस के माध्यम से फेफड़ों में प्रवेश कर जाते है। यही वजह है कि यह बीमारी एक से दूसरे इंसान में आसानी से फैल जाती है। यह बैक्टीरिया विषाक्त पदार्थ बनाते हैं, जो कि श्वसन तन्त्र की सिलिया झिल्ली को नुकसान पहुंचाते है, वायुमार्ग में सूजन करते हैं। ये जीवाणु रोगी को छूने, साथ खाने, उसकी खांसी के संपर्क में आने से भी हो सकता है।
जिन लोगों को काली खांसी होती है उनके आस पास रहने वाले लोगों को इसके संक्रमण की संभावना अधिक रहती है।

काली खांसी के लक्षण-Hooping cough

नाक का बहना,आंखें लाल पड़ना तथा उन से पानी निकलना
हल्का बुखार होना, खांसी में कफ आना,उल्टी आना,लगातार आवाज के साथ बहुत तेज खांसी,खांसी के दौरान या बाद में उल्टी होना, खांसी के दौरे होने के बाद थकान महसूस होना। सिरदर्द, कभी-कभी फेफड़ों में सूजन होना, मांसपेशियों पर जोर पड़ने से छाती में दर्द आदि हो सकता है

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काली खांसी का घरेलू इलाज-

1. लहसुन- लहसुन की 5-6 कलियों को छीलकर बारीक काट लें। उन्हें पानी में उबाल लें। इस पानी से भाप लें। प्रतिदिन ऐसा करने से 8-10 दिन में काली खांसी खत्म हो जाती है।

2. तुलसी के पत्ते – तुलसी के कुछ पत्ते कालीमिर्च लेकर दोनों को बराबर मात्रा में लेकर पिस लें इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर इसे दिन में तीन बार चूसें। ये गोलियां खांसी को मिटाकर गला साफ कर देती हैं।

3. बादाम- तीन-चार बादाम रात में पानी में भिगाकर रख दें। सुबह बादाम के छिलके उतार लें। इसे एक कली लहसुन और थोड़ी सी मिश्री के साथ पीस लें। इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर बच्चे को खिलाएं। इससे बच्चों की काली खांसी ठीक हो जाएगी।

4. लौंग-2-3 लौंग लेकर उनको आग में भुन लें और शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम चाटें। काली खांसी खत्म हो जाएगी।

5. अदरक- दो-तीन अदरक के टुकड़े लेकर इनका रस निकाल लें और इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से काली खांसी जल्दी ही ठीक हो जाएगी।

6. हल्दी- एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी डालें। इसको चम्मच से हिलाकर रोजाना इसका सेवन करे इसका एक हफ्ते तक तक सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है।

7. निम्बू – एक गिलास पानी लेकर उसमें आधा नींबू निचोड़ लें। और इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करने काली खांसी ठीक हो जाती है।

8. ऑर्गेनिक शहद – एक बड़ा चम्मच ऑर्गेनिक शहद लेकर इसे एक कप गुनगुने पानी में डालकर इसका सेवन करने से काली खांसी ठीक हो जाती है।

9. यह सब उपचार करने पर भी खांसी ठीक नहीं हो तो होम्योपैथिक दवाई Senega Q बच्चों की उम्र के अनुसार इसे 1 या 2 बून्द पानी मे मिलाकर देने से यह रोग जल्दी और जड़ से खत्म हो जाता है।

10. बुजुर्गो में होने वाली काली खांसी के लिए होम्योपैथीक दवा ड्रासेरा -30 या nux vomica- 30 लेना है

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