आसान नुस्खे

हमारा भोजन (Food) कैसा होना चाहिए?

Food

हमारा भोजन (Food) कैसा होना चाहिए?
भोजन (Food) जीवन का आधार है। शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक और संतुलित भोजन (Food) से शरीर स्वस्थ ही नहीं, निरोग भी रहता है। भोजन (Food) रोग भी पैदा करता है और रोगों की चिकित्सा भी करता है, इसलिए बीमारी में परहेज और पथ्य दवाओं से अधिक प्रभावकारी होता है।

खास बात यह है कि ज्यादातर लोग भोजन (Food) में स्वाद की तलाश करते हैं और उसे सिर्फ जीने की जरूरत मानकर चलते हैं। वे भोजन (Food) को स्वस्थ, सुखद और दीर्घ जीवन से जोड़कर नहीं देखते। सच यह है कि हमारा गलत खानपान ही हमारे अनेक रोगों का कारण है। यदि नियम और समय से सात्विक और संतुलित खानपान रखा जाए तो बहुत-सी बीमारियों से तो बचा जा ही सकता है, साथ ही यह लंबी उम्र का भी राज है।

पूर्णता- हमारे भोजन (Food) में पूर्णता होनी चाहिए यानि जिस गेंहू के आटे से हम रोटी बनाते है वो आटा चोकर सहित और हल्का मोटा पिसा हुआ होना चाहिए। हम जो आटा इस्तेमाल करते है वो चोकर रहित तो होता है ही साथ ही आता बिलकुल मेदे जैसा होता है।चोकर रहित यानि गेंहू के उपर वाला भाग जिसे हम चलनी से छानकर अलग कर देते है,इसके बिना गेंहू अधुरा है , गेंहू का चोकर हटाकर अगर हम रोटी बनाते है तो वो आंतो में जाकर चिपकती है जिससे कब्ज की शिकायत व्यक्ति को आये दिन रहती है… चोकर सहित और हल्का मोटा पिसा हुआ आटा पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसकी बनी रोटी में फाइबर होने की वजह से खाना आंतो में नही चिपकता। गेंहू को शक्तिशाली बनाने के लिए आप 10 किलो गेंहू में 1 किलों जो और 1 किलो चना मिलाकर उसकी रोटी बनाकर खा सकते है
(30 ग्राम गेंहु में 98.7 केलोरी और 4.54 ग्राम फाइबर होता है)

 
 
भोजन में दूसरा गुण होना चाहिए “ताजगी”
भोजन (Food) में ताजगी होनी चाहिए । फल और सब्जियों का उपयोग जितना हो सके ताजा ही करना चाहिए ।बिना मौसम कोल्ड स्टोर से आये हुए फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने में कोई लाभ नही है।
आमतोर पर देखने को आता है की व्यक्ति बिना मोसम के महेंगे और दुसरे देशों से आये हुए फल और सब्जियों को सेहत के लिए बढ़िया मान कर लेता रहता है । फल और सब्जियाँ मौसम के अनुसार और अपने इलाके की होनी चाहिए। जैसे की उत्तर भारत में सर्दियों में कोई भी मीठा फल पैदा नही होता, क्योकि मीठे को पचाने के लिए प्राण शक्ति अधिक खर्च होती है उत्तर भारत में सभी मीठे फल गर्मियों में पैदा होते है जैसे की पपीता,तरबुज,केला,आम,खरबूजा,लीची आदि । और सर्दियों में अमरुद,कीनू,बेर और अनार तथा गाजर,मूली,बंदगोभी,शलगम,चुकंदर,पालक,धनिया,बथुआ,सरसों का साग, मेथी आदि पैदा होते है जो की अधिक उपयोगी है क्योकि इनको पचाने में प्राण शक्ति कम खर्च होती है। अधिक शक्ति सर्दी का सामना करने में लग जाती है।
नारियल- माँ प्रकृति का ताजगी का उपरोक्त सिद्धांत केवल नारियल को छोड़कर सभी प्रकार के फल और सब्जियों पर लागू होता है। नारियल तो अमृत तुल्य है और माँ के दूध के समान गुणकारी है।हर मौसम,स्थान,आयु और रोग में अत्यंत लाभकारी है।
नारियल मानव के लिए इस पृथ्वी पर सबसे बढ़िया भोजन (Food) है,अमृत तुल्य है । इसके नियमित उपयोग से मानव रोग मुक्त और पूर्ण स्वास्थ्य का आनंद ले सकता है ।
खाने योग्य कोई भी पदार्थ जो कुछ घंटो में पड़े-पड़े बासी विकृत नही होते, वे खाने लायक नही है। हम ताजा और हल्का रहना चाहते है तो हमेशा ताजा और हल्का खायें।
भोजन में तीसरा गुण “क्षारता प्रधान”-
भोजन (Food) दो प्रकार का होता है- 1. क्षारीय तथा 2. अम्लीय मानव का भोजन (Food) क्षारीय होना चाहिए। संसार में भी लगभग 70% मात्रा पानी की है और 30% पृथ्वी की है। हमारे शरीर में भी लगभग 70% द्रव्य है और 30% हड्डी, मांस वगैरह है। अतः हमारे भोजन (Food) में भी 70% ऐसे पदार्थ होने चाहियें, जिनमें पानी (क्षारता) की मात्रा अधिक हो और 30% अनाज, दाल, चावल (अम्लीय) आदि अन्य पदार्थ हों। हमारे खून की PH Value 7.36 से 7.4 तक होनी चाहिए। जिसको बनाये रखने के लिए शरीर द्वारा निरंतर प्रयास होता रहता है।
जब हम अपने भोजन (Food) में अधिक अनाज और अन्य गरिष्ट पदार्थों का प्रयोग करते रहते हैं तो हमारे शरीर की PH Value अम्लीय (Acidic) हो जाती है। अम्लीय (Acidic) हो जाने पर हमारी हड्डियों के अन्दर से लचक (Elasticity) कम हो जाने के कारण अकड़न (Hardness) आ जाती है। परिणाम स्वरूप तमाम तरह के आधुनिक रोग, मधुमेह (Sugar), उच्च रक्तताप (High Blood Pressure), गठिया (Arthritis), दमा (Asthma), घुटनो के
दर्द, सरवाइकल, (Cervical), तथा कैंसर तक के रोग आ जाते है।
मानव का दुर्भाग्य है कि या तो अज्ञानवश या स्वादवश क्षारीय भोजन (Food) की जगह उसने अम्लीय भोजन (Acidic Food)लेना आरंभ कर दिया।
आम आदमी सुबह के नाश्ते में पराँठा, इडली, डोसा, भठूरा, कचौड़ी खाता है। दोपहर में रोटी सब्जी, शाम को 4 बजे चाय-बिस्किट, रात को दाल-रोटी खाता है। अर्थात चारों समय अम्लीय भोजन (Food) ले रहा है।
परिणाम स्वरूप पूरे दिन में एक बार भी पेट के अंदर क्षारीय भोजन (Food) नहीं जा रहा है, इस कारण हमारी हड्डियाँ सूख रही हैं। हड्डियों के रोग (Arthritis, Joint Pain, Dis-location, cervical Spondylosis)) गुर्दे व Gall Bladder की पथरी बन रही है। चर्म रोग लग रहें है। घुटनो की Greece या Calcium खत्म हो रही है, जबकि वर्षों तक Calcium या अन्य दवाएँ खाने पर भी किसी की Calcium या Greece पूरी नहीं होती क्योंकि हड्डियों में लचक या Greece तो अंदर से आती है जैसे पौधे को पानी देने से टहनियों के अंदर लचक (Flexibility) अंदर से आती है। हड्डियों में लचक का होना। (क्षारता होना) सामान्य अवस्था है जबकि अकड़न होना असामान्य (रोग की) अवस्था है।
निष्कर्ष यह है कि क्षारीय भोजन से शरीर के अंगो की तृप्ति हो जाती है।
क्षारता प्रधान खाद्य पदार्थ- हरे नारियल का पानी (डाभ)
, पेठे का रस (Petha juice) (इसे बड़ी पेठा और प्लेन पेठा भी
कहते हैं। जिससे पेठे की मिठाई बनती है उसी कच्चे पेठे का रस), केले
के डण्डे का रस (Banana Stem Juice), कढ़ी पत्ता (मीठी नीम), बेल पत्र,
मरूआ (नियाज्बो), मकोई, तुलसी पत्र, दूब घास आदि का रस।
हरे पत्तेवाली साग सब्जियाँ- जैसे कि हरा धनिया पदीना.,पालक मेथी, बथुआ, चौलाई आदि । हरी सब्जियाँ- जैसे लौकी (घीया), तोरई टिन्डे, गाजर, मूली, शलगम आदि का कच्चा रस निकालकर या सब्जी बनाकर उपयोग किया जा सकता है। ये सब मौसम के अनुसार ही होनी चाहियें।
आलू, शकरकन्दी, अरबी, कचालू, जिमीकन्द आदि हैं तो सब्जी ही, लेकिन इनमें क्षारता की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए ये सब अनाज के तुल्य हैं और रोग की अवस्था में पचने में थोड़ा भारी होते है।

नींबू का उपयोग सलाद या भोजन के साथ नहीं करना चाहिए।

भोजन एवं सलाद की क्षारीय विशेषता को बनाए रखने के लिए,भोजन के साथ खटटे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पूरा भोजन अम्लीय (Acidic) बन जाता है। इसी प्रकार सलाद बहुत अधिक क्षारीय होते हुए भी इसमें नींबू का उपयोग करने से सलाद भी अम्लीय बन जाता है अर्थात इसकी क्षारीय विशेषता से हम वंचित रह जाते हैं। परिणामस्वरूप भोजन एवं सलाद को हजम करने की प्रक्रिया  मन्द हो जाती है।
नींब का उपयोग तीव्र रोगों नजला, जुकाम, बुखार या कोई भी ऐसा रोग जिसमें हमारे मुँह का स्वाद बदल जाता है उस स्थिति में कर सकते हैं। मेहमानों के लिए नींबू के रस को बिना मसाले के गुड़,शक्कर या देसी खाँड के साथ मिलाकर शिकंजी बनाकर दिया जा सकता है। सप्ताह में एक-दो बार नींबू की शिकंजी ली जा सकती है। हरे आँवले को कद्दूकस करके कच्ची सब्जियों के सलाद के साथ ले सकते हैं। हरे आँवले का रस निकालकर उपयोग करें, चाहें तो इसमें भी गुड़, शक्कर या देशी खाँड मिला लें।
फल-खरबूजा, तरबूज, संतरा, मौसमी, कीनू, अनार, अनानास, लीची, रसभरी, अमरूद, बब्बूगोशा, नाशपाती, नाख, आडू, खुमानी, जामुन,शरीफा आदि फलों में से मौसम के अनुसार लें। साथ में कच्चे नारियल की गिरी को कद्दूकस करके (दो बड़े चम्मच) उपयोग कर सकते हैं।
खरबूजा एवं तरबूज के साथ कच्चे नारियल की गिरी का उपयोग निषेध है। पाँच तरह के फल जैसे कि केला, चीकू, आम, अंगूर और पपीता का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि कि ये सब मसाले से पकाए जाते हैं। रोगियों के लिये अधिक मीठे फल हाजमें के लिये थोड़े भारी होते हैं। केला देखने में तो बढ़िया फल है लेकिन उसमें पानी की मात्रा कम होने के कारण रोगियों के लिये पचने में थोडा भारी है। सेब पर कीटनाशक (Pesticides) का प्रयोग बहुत ज्यादा होता है। यह पूरे वर्ष मिलता रहता है अधिकतर कोल्ड स्टोर का होता है। जब मौसम का सेब मिले तो थोड़ी मात्रा में उपयोग कर सकते हैं। जहाँ तक हो सके हरा सेब (Golden Apple) का प्रयोग करे। यह मौसम में ही मिलता है। इसको शीतग्रह (Cold Store) में भी नहीं रखा जाता। इसका छिलका खाने में नरम होता है। लाल सेब को लाल करने के लिए केमिकल्स स्प्रे किये जाते है गोल्डन एप्पल अधिक सुरक्षित है।
चौथा और आखरी गुण है भोजन को मात्रा में कम खाना- अल्प भोजन करने वाला दीर्घायु होता है। हमारा भोजन मात्रा में कम होना चाहिए। मानव सबसे अधिक गलती इसी सिद्धान्त में करता  है, क्योंकि हमें यह जानकारी नहीं है कि हमें भोजन कितनी मात्रा में लेना  चाहिए। हम यह मानकर चलते हैं कि भोजन में शक्ति होती है और स्वास्थ्यवर्धक भोजन को जितना ज्यादा लेंगे लाभ-ही-लाभ है। वास्तव में यह बैंक नहीं है कि जितना इसमें डालेंगे उतना ज्यादा लाभ होगा। इस बात को अच्छी तरह समझना है। इसके साथ ही यह समझना भी अत्यंत आवश्यक है कब खायें, क्या खाए, कैसे खाए और कितना खाए? जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि भूख लगने पर ही खायें । प्राकृतिक और ताजा भोजन ही खाएँ । खाने लायक पदार्थों को अच्छी तरह चबा-चबाकर खायें और पीने वाले पेय पदार्थ घुट-घुट कर मुँह में रोक-रोककर पीएं। यदि हम प्राकृतिक भोजन ही खा रहे हैं फिर भी मात्रा में ज्यादा होने के कारण पूर्णतया लाभ नहीं होता। हमें भोजन मात्रा में कितना लेना
चाहिए? इसके लिये हमारे शरीर में माँ प्रकृति की ओर से चेतावनी देने का प्रबन्ध है। चेतावनी के रूप में हमें चार प्रकार की डकारों का अनुभव होता है इन 4 तरह की डकारों पर हम पहले ही विडियो बना चुके है जो इस प्रकार है
 

4 thoughts on “हमारा भोजन (Food) कैसा होना चाहिए?

  1. Akash Prajapati says:

    You always give us very traditional, true and scientific information for good wellness of human beings

  2. Prince Maurya says:

    Give this type of natural tips regularly and thank you for sharing information

  3. Abhi Chauhan says:

    Boht khoob 🙏
    Shukriya!!

    Ek request hai, nazla zukam jad se khatam krne k liye complete daily routine bataen please…

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