कच्चे आहार (Incurable diseases by raw diet) द्वारा असाध्य रोगों का 5 असरदार उपचार

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कच्चे आहार (Incurable diseases by raw diet) द्वारा असाध्य रोगों का 4 असरदार उपचार करें। 9000 से अधिक अंतिम अवस्था के कैंसर Cancer रोगियों पर अपक्वाहार के प्रयोगों द्वारा जो आशातीत सफलता मिली है,

वह अवर्णनीय है। इनमें सैकड़ों कैंसर Cancer के मरीज कैंसर से सम्पूर्ण मुक्त होकर 10-15 साल बाद भी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति अपक्वाहार से कैंसर से मुक्ति की बात पर अविश्वास और जहरीली दवाओं या उपचारों द्वारा कैंसर से मुक्ति पर अधिक विश्वास करता हैं तो वह निश्चय ही अज्ञानता एवं भ्रम के गहरे सागर में डूबा है। 
अपक्वाहार द्वारा कैंसर Cancer से मुक्ति पर अविश्वास करना ऐसा ही जैसे कोई शुद्ध हवा द्वारा स्वास्थ्य लाभ पर अविश्वास करता हो। प्रकृति के नियमों,जीवन एक आहार रूपी समुन्द्र में गोते लगायेगा, उसे केवल स्वास्थ्य के अनमोल रत्न,खजाने ही मिलने वाले हैं। जो किनारे पर खड़ा होकर, इसे सरल सच्चाई पर अविश्वास कर,तर्क और असंमजस में उलझा रहेगा,वह भटक कर दुःख को प्राप्त होगा,इसमें संशय नहीं।अंतिम अवस्था में राहत ही राहत- जो कैंसर के मरीज अंतिम अवस्था में पंहुच चुके होते हैं उन मरीजों को अपक्वाहार जब भूख के अनुसार दिया जाए तो वह दर्द, पीड़ा,बैचेनी एवं सभी कष्टदायक लक्षणों से मुक्त होकर अंतिम श्वास तक सामान्य लक्षण रहित,शांत,पीड़ा रहित रहते हैं, तथा सहज शान्तिपूर्वक मृत्यु को प्राप्त होते हैं। 
अंतिम अवस्था के हजारों मरीजों पर यह प्रयोग आप निसंदेह आजमा कर देख सकते हो इस आहार के सिवाय अन्य कोई आहार ऐसा लाभ नहीं दें सकता,यह आप पूरे विश्वास के साथ कर सकते हो,बल्कि अन्य आहार (सामान्य पक्व आहार,दूध,चाय इत्यादि)ही पीड़ा एवं बैचेनी के प्रमुख कारण होते हैं। अपक्वाहार भी कैंसर के रोगी की मांग के अनुसार ही कम या ज्यादा देना चाहिये, 
जबरदस्ती नहीं अपक्वाहार एक ऐसा जुआ है जिसमें अंत में हर हालत में आप ही लाभाविंत होते हैं अगर जीवनी-शक्ति रोगमुक्ति के योग्य है तो इसी अपक्वाहार द्वारा कैंसर से मुक्त हो जायेंगें और जीवन-शक्ति अगर क्षीण हो चुकी है तो यही अपक्वाहार आपको वह राहत व शान्ति देगा जो विश्व का कोई उपचार या दवा आपको नहीं दे सकता।

अपक्वाहार द्वारा एड्स रोग पर विजय-

एड्स निश्चय ही कैंसर Cancer से भी अधिक घातक एवं कष्ट दायक रोग हैं।किसी भी एड्स रोगी पर स्वंय कोई प्रयोग या अनुभव नहीं किये हैं कैंसर की तरह एड्स रोग को भी अपक्वाहार द्वारा निश्चित रूप से जीता जा सकता है। या ऐसा लाभ अवश्य दिया जा सकता है,जो अन्य किसी भी दवा या चिकित्सा पद्धति से सम्भव ही नहीं हैं। 
अमेरिका में कुछ चिकित्सकों ने अपक्वाहार द्वारा एड्स के कई मरीजों को नवजीवन प्रदान किया है, जिसमें विशेषकर सेन फंसिस्को के डॉ.साहनी शोध संस्थान (हीलिंग इंस्टीटयूट ऑफ साहनी इफेक्ट) की निदेशिका डॉ जेस्लिन एम. नेल्सन का नाम उलेखनीय है। 
यह चिकित्सक एड्स के अनेक रोगियों को ठीक कर चुकी हैं। प्रबल रोग-प्रतिरोधक क्षमता एवं जीवन शक्ति को बढ़ाने वाला एक ही तो आहार है “अपक्वाहार” तो एड्स क्यों नहीं ठीक हो सकता ? अंत में थक-हार कर अपक्वाहार की और लौटना ही पड़ेगा। यही एक दरवाजा है जिससे लोग जीवन की तरफ भाग सकते हैं, बाकी सब मृत्यु के द्वार हैं। एड्स यानि रोग-प्रतिरोधक क्षमता की गम्भीर एवं अपक्वाहार यानि भरपूर रोग-अधिक क्षमता का विकास।

गुर्दे के असाध्य रोगों में लाभ-Incurable diseases by raw diet

यहाँ पर फिर एक बार अपक्वाहार का अर्थ है शरीर का नवनिर्माण। हमारे कमजोर काम कर रहे अंगों को अगर कोई नई शक्ति या क्षमता दे सकता है तो वह है अपक्वाहार एवं व्यायाम। नेफराइटिस (गुर्दे की सूजन)(Kidney inflammation),पेशाब सम्बन्धी तकलीफें या पथरी इत्यादि छोटे-मोटे रोग प्राकृतिक उपचारों से ठीक हो जाते हैं,परन्तु कुछ गुर्दे के ऐसे रोग हैं जिनको असाध्य माना जाता हैं। जैसे-नेफराइटिक सिंड्रोम,इस रोग में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन पेशाब में जाता रहता है। 
Blood (रक्त) यूरिया एवं क्रियेटिनाइन अक्सर बढ़ा हुआ मिलता हैं। इस रोग का कहीं कोई उपचार नहीं हैं। जो इस रोग से ग्रसित रहे हैं। विश्व के कई ओलंपिक खिलाड़ी भी (उच्च प्रोटीन युक्त आहार लेकर) इस रोग से ग्रसित होने के बाद सम्पूर्ण रोग मुक्त होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। अपक्वाहार गुर्दे के क्षतिग्रस्त हो रहे नेफरोंस (कोशाणु)के क्षय को रोक कर नव-निर्माण कर देता है। परिणाम आने में 3 से 6 महीने लग जाते हैं।

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renal stenosis-

इस रोग में गुर्दे Kidney की बड़ी खून की नली कठोर होकर सूख जाती हैं, जिससे गुर्दे के उस भाग में सामान्य रक्त प्रवाह न होने से गुर्दे सिकुड़ जाते हैं या कमजोर हो जाते हैं जिससे रक्तचाप अत्यधिक ऊँची अवस्था में रहता हैं। किसी भी चिकत्सा पद्धति के चिकित्सक को यह विश्वास नही होगा कि stenosis कभी ठीक हो सकता हैं,परन्तु इसमें कई मरीजों में शत- प्रतिशत लाभ की सम्भावना नहीं होती, जो आशिंक लाभ लेकर भी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

chronic renal failure-

यह गुर्दे के रोगों Kidney diseases में सबसे कष्टदायक, अवस्था हैं,इसमें दोनों गुर्दे क्षतिग्रस्त होकर काम करना बिलकुल बंद कर देते है तथा रोगी को Dialysis (रक्त छानने वाली मशीन) पर रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता है। कैंसर की तरह सैकड़ों गुर्दा-रोगी मेरे इस प्रकार के उपचार में रहे हैं।
इसका निष्कर्ष इस प्रकार हैं-
(1) कई बार गुर्दे अतिश्रम एवं पुरानी सुजन के कारण ऐसी अवस्था में पहुँच जाते हैं कि वे सामान्य ढंग से कार्य नहीं कर पाते हैं। इसमें रक्त यूरिया एवं क्रियेटिनाईन बढ़े हुए मिलते हैं। यह एक अस्थायी अवस्था होती हैं। परन्तु एलोपैथिक डॉक्टर एवं उनके निदान रोग की इस अवस्था को देखकर गलतफहमी में पड़ जाते हैं तथा गुर्दों के पूर्णतया अक्षम (fail) होने का दावा कर जाते है ऐसे रोगी अपक्वाहार पर आते ही सुधरने लगते हैं तथा कई बार रोगमुक्त हो जाते है। परन्तु ऐसे मरीज 10-15 प्रतिशत ही होते हैं।

(2) अधिकतर मरीजों के पुरे गुर्दे अक्षम (fail) हो जाते हैं। उनको अपक्वाहार द्वारा डायलिसिस की संख्या कर सकते हैं,परन्तु ठीक नहीं कर सकतें। जो लोग नए गुर्दे लगवा लेते हैं,वे सही अपक्वाहार द्वारा उस नये गुर्दे को क्षतिग्रस्त होने से बचा सकते हैं तथा लम्बी आयु को प्राप्त कर सकते हैं,साथ ही साथ नये गुर्दे से जो परेशानियां होती हैं,उनसे केवल अपक्वाहार पर रहकर ही बचा जा सकता हैं। पक्वाहार, अनाज, दूध, नमक, दालें खाकर हम नये गुर्दे को लम्बे समय तक स्वस्थ नहीं रख सकते हैं।

(3) लम्बे समय से मधुमेह रोग के कारण गुर्दे में क्षति आ रही होती हैं,अपक्वाहार द्वारा उसको रोका जा सकता है तथा कई रोगियों को आशिंक लाभ दिया जा सकता है। इस रोग को डाइबेटिक नेफ्रोपैथी (diabatic nephropathy) कहा जाता हैं।
(4) अपक्वाहार में रोग की स्थिति के अनुसार सही आहार का चुनाव अत्यंत आवश्यक है। परन्तु मोटे तौर पर गुर्दे के रोगी को मुख्यतया कार्बोहाइड्रेट आहार पर निर्भर रहना होता है। गिरियां एवं अंकुरित दालों का उपयोग बंद रखना होता है सलाद,सब्जियों के कच्चे रस पर निर्भर रहना होता हैं,फलों का सिमित उपयोग करना होता है,इसलिए इस विशेष रोग में सही प्राकृतिक आहार विशेषज्ञ का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।
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