(Office worker diet) ऑफिस वर्कर किस तरह करे भोजन 6 आसान उपाय जिससे नींद नही आए

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Office worker diet

(Office worker diet) ऑफिस वर्कर किस तरह करे भोजन 6 आसान उपाय जिससे नींद नही आए। दिमाग से अधिक काम लेना है तो पेट को काम कम दें पेट बढ़ा तो दिमाग घटा और पेट घटा तो दिमाग बढ़ा।

खाने वाले पेटू लोग मानसिक श्रम में कमजोर होते हैं। शारीरिक मेहनत करने वाले लोग,मेहनती,शारीरिक काम की वजह से दिन भर बार-बार अधिक नही खा पाते हैं। इसलिए उनमें स्वास्थ्य कि अधिक सम्भावना हैं,परन्तु मानसिक श्रम करने वाले बैठे रहने की वजह से फुर्सत के क्षणों में दिमाग के बदले मुहँ को हर वक्त चलाना जारी रखते हैं।इसलिए उनके बीमार होने की सम्भावना होती है। नाश्ते में ठोस आहार या भोजन लेने वाले (बड़ी अजीब बात है 2 रोटी खायें तो नाश्ता, 4 रोटी खायें तो खाना) व्यक्ति ऑफिस काम कम,नींद अधिक लेते हैं -फुर्तीले कम, सुस्त अधिक होते हैं। 
ऑफिस जाते समय रास्ते में बस और कार में ये नजारे देखे जा सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आप पूरे दिन चुस्त,हल्के,फुर्तीले,जागरूक,अधिक शक्ति और संतुलित दिमाग वाले रहें, आपको कार्य की सफलता के लिए अच्छी मानसिक शक्ति या श्रम की आवश्यकता है तो सुबह से शाम तक सिर्फ फल, सलाद, सूप स्वास्थ्यवर्धक पेय,गन्ने का रस, फल-रस या पतला मट्ठा जैसी वस्तुओं के अलावा कोई ठोस आहार नहीं लें।अगर दोपहर के समय भूख ज्यादा महसूस होती हो तो हल्का-सा ठोस आहार ले लें।

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मानसिक श्रम करने वालों के लिये-

नाश्ते की तरह, भोजन की तरह नहीं मुख्य घर लौटने के बाद ही करें। मानसिक श्रम करने वाले 24 घंटों में एक बार ही भोजन करें। कभी स्टार्च प्रधान आहार ले लें। तो कभी प्रोटीन प्रधान आहार,इस तरह परिवर्तन करते रहें। मानसिक श्रम करने वालों को श्रेष्ठ स्टार्च या शर्करा (शुगर) फलों से, सलाद से मिल जाता है। इसलिए शाम का भोजन प्रोटीन प्रधान बना सकते हैं। मानसिक श्रम करने वाले कम खाकर ही ज्यादा स्वस्थ रह सकते हैं। 
मानसिक श्रम करने वाले दूध को जीवन से निकल कर अपनी क्षमता को अधिक बढ़ा सकेंगे। दूध के बदले सूखे मेवों (काजू,अखरोट,नारियल,बादाम वगैरह) का दिन भर में सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल करें जो आपके लिए श्रेष्ठ है। मानसिक श्रम करने वालों को सूखे मेवे में मिलने वाली चर्बी के अलावा अन्य किसी भी प्रकार की चर्बी (मक्खन,तेल) का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए या बहुत ही कम करना चाहिए। दूध,दालें, माँस,अंडे, मूंगफली,सोयाबीन जैसे ठोस आहार,मानसिक श्रम करने वालों को नहीं के बराबर इस्तेमाल करने चाहिए। इनसे हरसंभव बचें। आलू, चावल,मट्ठा,रोटी, मेवे,फल,सलाद इनके लिए अधिक हितकारी हैं।
ताजे फलों का अभाव हो, तब ही सूखे फल इस्तेमाल करें। चाहें तो दिन भर खट्टे-मीठे फल खाकर शाम को सलाद और मेवे खायें। भीगी मूंगफली, तिल, अखरोट, नारियल, तरबूज,के बीज, अंकुरित धान्य कम दाम के श्रेष्ठ, ठोस आहार हैं। मेवे या पौष्टिक दूध अथवा अंकुरित धान्य दिन में एक बार किसी न किसी रूप में अवश्य लें।
शारीरिक और मानसिक श्रम करने वालों में नाममात्र का ही अंतर हैं। श्रम करने वाले के शरीर में अधिक कोषाणु टूटेंगें। ते सहज ही अधिक माँग (भूख) होगी। परिश्रम कर रहे हैं, इसलिए अधिक खा लें,ऐसा नहीं करें। शरीर की माँग हैं, भूख हैं, तो अवश्य पूर्ति करें, परन्तु आहार संयोजन के नियमों में कोई अंतर नहीं करें।
मानसिक श्रम करने वालों को भी शारीरिक श्रम करना जरूरी हैं शारीरिक श्रम से बनने वाले हार्मोन से एकाग्रता बढ़ती हैं। कम शारीरिक श्रम करने वाले अगर अपने पाचन को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो सिर्फ अंकुरित धान्य, फल, खजूर, अनार का रस, केले आदि खाकर ही पूरा दिन गुजारें और काम से मुक्त होने के बाद शाम को भरपेट मुख्य भोजन करें। भोजन के बाद सम्पूर्ण विश्राम जरूरी हैं। यदि आप दोपहर को भोजन के बाद एक घंटा विश्राम कर सकते हैं तो ही भोजन करें। अन्यथा नुकसान की अधिक सम्भावना हैं क्योंकि शरीर की शक्तियाँ या तो पाचन के लिए मिल सकती हैं या सिर्फ काम करने के लिए। खून और शक्ति वहीं भागती हैं, जहाँ इसकी अधिक माँग होती हैं। खाकर काम करने अर्थ हैं – कमजोर पाचन, अवरुद्ध पाचन।
आप स्वयं निर्णय करें ! मेहनत अधिक होगी तो शरीर ज्यादा आहार की माँग करेगा। शरीर का कम उपयोग होने पर शरीर की माँग भी अपने आप कम हो जायेगी। शरीर की माँग के हिसाब से ही आहार लें। कम काम तो कम भूख, इसलिए छुट्टी के दिन घर में या बाहर ज्यादा नहीं, कम ही खायें।

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