पीलिया रोग(Jaundice disease) के कारण बचाव उपचार

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पीलिया की समस्या(Jaundice disease) –

पीलिया रोग (Jaundice disease)अधिकांशत: पानी की अशुद्धि के कारण होता है इसका मुख्य कारण शरीर में सही ढंग से खून ना बनना है इस कारण शरीर में पीलापन आ जाता है। सबसे पहले आखों में पीलापन आता है उसके बाद शरीर और मूत्र पीला होता है। जब आपकी आखें और त्वचा पीली हो जाती है तब आपको पीलिया रोग(Jaundice disease) होता है।
जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के कुछ हिस्से टूट जाते है तब बिलीरुबिन नामक एक पीला पदार्थ शरीर में बनता है जिसे लीवर फ़िल्टर करके हमारे शरीर से बाहर मल या मूत्र के द्वारा निकाल देता है पर जब लीवर में गड़बड़ी होती है तो वह इसे फ़िल्टर नहीं कर सकता है। जिसके कारण धीरे-धीरे यह खून में फैल जाता है जिससे पीलिया रोग होता है। यह खून में अपशिष्ट पदार्थ के रूप में फैल जाता है। बिलीरुबिन शरीर में ज्यादा मात्रा तब बनता है जब हमारे शरीर की पित्त नलिकाएं बाधित हो जाती है या हमारे लीवर में सुजन आ जाती है। अत्यधिक बिलीरुबिन बनने के कारण ही पीलिया रोग होता है।
पीलिया रोग एक आम लीवर रोग है। पीलिया से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा के रंग में बदलकर पीला हो जाता है। बिलीरुबिन के स्तर के आधार पर त्वचा और आंखों का रंग अलग-अलग होता है बिलीरुबिन का मध्यम स्तर होने पर पीला रंग दिखाई देता है,जबकि बहुत उच्च स्तर होने पर भूरा रंग का दिखाई देता है। गहरे रंग का मूत्र और खुजली, पीला मल भी हो सकता है।

वयस्कों में पीलिया के कुछ कारण-

हेपेटाइटिस- यह रोग हमे ड्रग्स लेने या हमारे इम्यून सिस्टम के कमजोर होने के कारण हो सकता है इससे हमारे लीवर को नुकसान हो सकता है जिससे हमे पीलिया रोग हो सकता है।
लीवर में सुजन होना- लीवर में सुजन के कारण बिलीरुबिन को फ़िल्टर करने और स्राव करने की लीवर की क्षमता कम हो जाती है। और जिससे बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे पीलिया हो सकता है।
अभी यह आपको कुछ कारण बताये जा रहे है जिनकी वजह से लीवर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है,भले ही आपको यह साधारण लगे या आपका इन चीजो पर ध्यान न जाए पर ये कारण ही है जो कही न कही आपके लिए धीमे जहर का काम कर रहा है
अधिक मात्रा में शराब का सेवन करना- यदि आप लम्बे समय से बहुत अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते है लगभग 8-10 वर्ष तक शराब पीने से आपने अपने लीवर को बुरी तरह प्रभावित किया है। तो इससे आपको पीलिया हो सकता है
हेमोलिटिक एनीमिया- इस स्थिति में बड़ी मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं और जिससे बड़ी मात्रा में बिलीरुबिन का उत्पादन होता है इससे पीलिया का खतरा बढ़ जाता है।
अवरुद्ध पित्त नलिकाएं- यह नलिकाएं पतली होती है जो लिवर और पित्ताशय की थैली से छोटी आंत में तरल पदार्थ ले जाती हैं। कभी कभी यह नलिकाएं पित्त की पथरी होने,या असामान्य लीवर की बिमारियों से अवरुद्ध हो जाती है। जिससे पीलिया का खतरा बढ़ जाता है।
पीलिया के लक्षण-
पीलिया में बहुत तेज खुजली होने लगती है। और रोगी को नींद नहीं आती है।स्किन का पीला पड़ना,आंखों का सफेद होना,पेशाब का रंग गहरा पीला होना, मल का रंग सामान्य न होना,बुखार,पेट में दर्द,बदन में खुजली,वजन कम होना आदि लक्षण है।

पीलिया होने पर निम्नलीखित सावधानियां है-

पीलिया में वसायुक्त और तेल युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना है तुरंत का बना शुद्ध भोजन ही करना है। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखने के लिए तरल पदार्थ और पानी का सेवन करें। आम और पपीता जैसे फल खाएं जो लिवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। शराब का सेवन बिलकुल नहीं करना है दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरुर पीना है। ओटमील, जामुन और बादाम जैसे उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
और सबसे जरूरी बात यह है कि आपको पहले कारण का पता लगाना है और उस कारण को ठीक करना है जब तक कारण ठीक नहीं होगा बीमारी का इलाज नहीं हो सकता है इसलिए पहले कारण को ठीक कीजिए

लीवर को स्वस्थ रखने के कुछ अद्भुत उपाय

गन्ने का रस- गन्ने के रस को 1-2 गिलास रोज पीनी है जब तक आपकी हालत में सुधार नहीं होता है, तब तक यह आपके लिवर को मजबूत करने में सहायक होगा और इसलिए यह पीलिया के लिए एक शानदार इलाज है।
हरे अंगूरों का रस – इसका रोजाना सेवन किया गया एक कप लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाकर पीलेपन को अवशोषित कर लेता है। यह रस बिलीरुबिन के स्तर को कम करता है।
लहसुन- लहसुन में तीन-चार लौंग मिलाकर अच्छे से कूट लें और रोज खाना खाते वक्त खाए तो यह आपके लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है क्योंकि इसमें मौजूद एलिसिन नामक पदार्थ की वजह से पीलिया तेजी से ठीक होगा।
अदरक- अदरक को कूट कर या उबालकर इसके रस को दैनिक रूप से एक पेय के रूप में पिया जाये तो यह लीवर का जीवन बढ़ा देता है क्योकि इसमें एंटीऑक्सिडेंट और हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव होते हैं।
आंवला- 2-3 आंवला उबालकर इसमें शहद मिलाकर 2-3 गिलास पीने से इसमें मौजूद विटामिन सी और अन्य पोषक तत्वों के एंटीऑक्सीडेंट गुण लीवर के जीवन को बढ़ाते है।
जौ का पानी- एक चम्मच जौ के बीज को पानी और शहद के साथ मिक्स कर लें और रोजाना इसका सेवन करें। इसमें मूत्रवर्धक और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो विषाक्त पदार्थ और यहां तक ​​कि बिलीरुबिन को बाहर निकालते हैं।

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