सावधान, मिलावटी मिठाई के दुष्प्रभाव से (Side effects of sweets)

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सावधान, मिलावटी मिठाई के दुष्प्रभाव से (Side effects of sweets) प्रकृति ने मानव शरीर की ऐसी रचना की हैं

कि उसका शरीर शर्करा (मिठास, ग्लूकोस,) से ही संचालित हैं हम चाहे जो खायें शरीर उसका उपयोग अतंत: शर्करा से ही रूपांनतरण कर उपयोग करता हैं-                              चाहे प्रोटीन और चर्बी ही क्यों नहीं हो। प्रकृति ने हमारे ठीक शरीर की इस रचना के अनुसार हमारे लिए भरपूर मीठे फलों की व्यवस्था की हैं। मिठास की तरफ                             हमारा आकर्षण स्वाभाविक हैं। मजबूरी में हमने जब गलत आहार-अनाज चुन लिया तो मिठास एक समस्या हो गई।

हमने अनाज में फलों की मिठास मिलानी शुरू कर दी। (चीनी,गुड़ इत्यादि) अनाज और मिठास को मिलाकर हमने झूठे, बनावटी फल (मिठाइयाँ) बना दिए।
ये फल झूठे हैं इसलिये स्वास्थ्य भी बनावटी हो गया- तो रोगों में उलझना स्वाभाविक था। कुदरत ने हमें बने बनाए मीठे फल रूपी (मिठाई) दी, मानव की
कुबुद्धि ने झूठे फल दिए,पाचन नियमानुसार अनाज और मिठास (शहद, गुड़, चीनी) विरुद्ध आहार हैं इनका कोई मेल नहीं हैं। शर्करा सबसे जल्दी कुछ मिनटों
में ही हजम हो जाती हैं- इसलिए जब ये किसी भी देर से पचने वाले ठोस आहार अनाज, दूध,मेवों के साथ जाती हैं तो शीघ्र न पचने के कारण सड़कर
विकृत होकर शराब बन जाती हैं।

इन बनावटी शर्कराओं (गुड़, चीनी) का किसी भी आहार के साथ मेल नहीं हैं। ये सभी के साथ सड़ती हैं और पाचन में बाधा बनकर अपच और विष द्रव्य
का कारण बनती है। इसलिए अनाज-दूध से बनी सारी मिठाईयाँ हानिकारक होती हैं हम क्यों ऐसी बनावटी मिठाईयाँ खाते हैं? हमारा शरीर क्यों मिठास की
माँग करता हैं, क्या ये अपने आप में ठोस सबूत नहीं हैं कि हमारे शरीर को मीठे फलों की आवश्यकता हैं, परन्तु हम फलों को बर्बाद कर उसकी शर्करा और
संतुलन को विकृत कर फीके बेस्वाद, अनाज के साथ बनावटी फल बनाकर खाते हैं। हम फलों से सीधे मिठास शर्करा लेने के बजाए आग और मशीनों से
विकृत कर चीनी, गुड़ बनाकर दूसरे आहारों के जरिए शरीर को शर्करा देते हैं जो आहार बाहर लुटकर अंततया शरीर को ही लूटते हैं।
नकली फल (मिठाईयाँ) नहीं असली फल खाईए।

आपने कभी गौर किया हैं कि हम क्यों मीठा खाते हैं अनाज में क्यों फलों से बनी चीनी, गुड़,शहद मिलाते हैं, दूध में क्यों चीनी डालते हैं, हमें मीठा क्यों
अधिक अच्छा लगता हैं? क्यों हम चीनी, गुड़ के बिना जी नहीं सकते? सच तो ये हैं कि अगर नमक मसाले घी ही न हो तो फीके, रूखे अनाज ऐसे ही
खाना एक सजा स्वरूप लगते हैं- हम इसलिये फीका अनाज खा भी लेंगे क्योंकि सदियों से इसको भ्रम से मानव आहार जो मान लिया हैं। हमसे ये ऐसे ही
नहीं खाया जाता इसलिये हमने चीनी, गुड़ मिलाकर एक बनावटी स्वाद, मिठास पैदाकर मिठाई जैसा सुंदर शब्द गढ़कर खाने की कोशिश करते हैं।

एक तरफ हम अनाज खा नहीं सकते इसलिये मिठास द्वारा खाने की कोशिश करते हैं- दूसरी तरफ शरीर मिठास (शर्करा) की स्वाभाविक माँग करता हैं
इसलिये हमें अनाज- में मिठास खानी ही पड़ती हैं। आखिरकार शरीर की खोज मिठाई में छुपे फलों की शर्करा ही तो हैं- इसलिये हमें मिठाई प्रिय हैं वास्तव
में आप फलों की शर्करा का ही आनन्द ले रहे होते हैं। परन्तु ऐसी झूठी बनावटी मीठे फलों की नकल वाली ये मिठाईयाँ खाने का क्या मतलब? इन
मिठाइयों के नुकसान जंग- जाहिर हैं। ये रोगों का घर सिद्ध होती आई हैं।

इसी झूठी मिठाई को बनाने में कितनी मेहनत- पहले न खाए जा सकने वाले अनाज के कच्चे दानों को आग ढूढ़ कर पकाओं, गाय को ढूंढकर उसका दूध
छीनों, दूध से घी पैदा करो- फिर गन्नों में से चीनी गुड़ को छिनकर निकालने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें बनाओ। घी चीनी भी पहले ही खूब उबल चूके और
अनाज के साथ घने ताप में पकाओं- तब तक जब तक आहार पचने लायक ही नहीं रह जाए- तब कहीं जाकर तैयार होती हैं। ”मिठाई”  मानव की इस
अव्वल दर्जे की बेवकूफी को ही हम मिठाई कहते हैं। ये तो अक्ल की पिटाई हैं। मेहनत प्रयत्न झूठ में होते हैं, सत्य सरल सहज होता हैं, झूठ जटिल, सत्य
सहज, सीधी साधी प्राकृतिक मिठाई से भरपूर मीठे फल क्यों न खाएँ, जिसको रचने में, पकने में कुदरत ने 4-6 महीने लगाये हैं। मिठास और अतिआहार-
जो अनाज हम फीकी अवस्था में अर्थात बिना नमक मसालें के जितनी मात्रा में खा सकतें हैं, वह ही उसकी वास्तविक मात्रा हैं- मिठास चीनी गुड़ के मिलाते
ही ये आहार दुगुने चौगुने खाए जाते हैं।

जो फीका अनाज या आहार हम बिना कड़क भूख के कभी खाने को तैयार नहीं होंगे – चीनी, गुड़ मिलाते ही वे बिना भूख के खा लिए जाएंगे, इस तरह
अतिआहार और अपच की जड़ हैं ये मिठास, किसी भी वस्तु को खाने के लिए आपको चीनी,गुड़ या नमक मसालों की याद आये तो समझ लेना आप न
खाने योग्य आहार खाने की कोशिश कर रहें हैं- जो मानव आहार नहीं हैं- जिसे खाकर आप सिर्फ रोगी ही होंगे। कुदरत ने मानव के लिए सिर्फ वो ही
आहार रचे हैं जिन्हें नमक मसालें, घी तेल और चीनी गुड़ जैसे बनावटी- रोगकारक खाद्यों के जरिये खाना नहीं पड़ता। फल मेवों में अपना ही अमृतमय
स्वाद हैं। अपना प्राकृतिक आहार अपनाते ही नमक, घी तेल मसालें चीनी गुड़ खाने ही मुश्किल हो जाते हैं। कैसे उपयोग करें इसका? इन बेकार रोगकारक
खाद्यों का हमारे आहार में जीवन में कोई स्थान नहीं हैं। अगर आप रोगी बनने को ही उत्सुक है तो अवश्य खाइए। धन्यवाद

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