हमारे शरीर में मोजूद 1 ऐसी शक्ति(vital power) जो हर रोग को ठीक कर सकती है

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क्या आपको पता है हमारे शरीर में एक ऐसी शक्ति(vital power) मोजूद है जो किसी भी रोग को ठीक कर सकती है वो भी बिना किसी दवा के …..क्यों चोंक गये ना   अभी आपको हमारे शरीर में मोजूद एक ऐसी शक्ति(vital power) के बारे में बताया जा रहा है जिससे किसी भी रोग का इलाज आप बहुत ही आसानी से कर सकते है

पेट में ढेरो दवाइया डालने से पहले हर व्यक्ति को इस बात का पता होना चाहिए की हमारा शरीर खुद बीमारियों को खत्म करने की ताकत रखता है…और निरंतर तरह तरह के बेक्टीरिया,वाइरसो से इस शरीर को बचाता है

और ये पॉवर हमे ईश्वर की तरफ से मिली है…और सम्पूर्ण मानव जात के साथ साथ जितने भी जीवधारी जो इस धरती पर जन्मे है या विचरण करते है उन सबको परमात्मा ने ये शक्ति शरीर धारण करते समय दी है जिसे “प्राण शक्ति” कहते है…

ये शक्ति एक store house के रूप में हमारे न्दर है,इस store house में से हमे रोजाना Energy का एक भाग मिलता है,जिसे  जीवनी शक्ति कहते है…प्रतिदिन शरीर के सभी के कार्य इस जीवनी शक्ति के माध्यम से ही होते है, भले ही वह तर्क-वितर्क बातचीत करने का काम हो… दोड़-धुप का काम हो… …भोजन को डाइजेस्ट करने का काम हो या फिर बीमारियों को ठीक करने का काम …

⇒भोजन और प्राण शक्ति का रहष्य जिसे जानने के बाद आप कभी बीमार नही होंगे (प्राण शक्ति Part-2)⇐click करें 

शरीर के माध्यम से ऐसा कोई भी काम नही होता जिसमे यह उर्जा खर्च न हो…जो उर्जा हमे प्रतिदिन मिलती है वह उम्र बढ़ने के साथ-साथ धीरे धीरे कम होती जाती है…- एक उदहारण से समजे जैसे हमारे घरों में बैटरी चलित उपकरण लगे हुए होते है तो जैसे जैसे उनकी बैटरी पुरानी होती जाएगी , वैसे वैसे उसकी चार्ज होने की capacity भी कम होती जाएगी …ठीक इसी तरह ज्यो ज्यो हमारी उम्र बढती जाती है वैसे वैसे हमारी जीवनी शक्ति भी कम होती जाती है…

इसलिए जब हम यंग ऐज में होते है तब बीमारियों को ठीक करने,भोजन को पचाने और भाग दोड़ करने me ये जीवनी शक्ति अधिक होती है…और बड़ी उम्र में ये शक्ति कम हो जाती है
जैसे अगर कम उम्र में किसी बालक की हड्डी टूट जाती है तो वो जल्दी जुड़ जाती है पर बड़ी उम्र में हड्डी जल्दी नही जुडती बल्कि उसे जुड़ने में ज्यादा समय लगता है ….क्योकी यहा सारा खेल प्राणशक्ति का है
शरीर में मोजूद प्राणशक्ति हर प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए मुख्य आधार है…बस जरुरत है इसे गहराई से समजने की…

अब थोडा शरीर में मोजूद गंदगी पर नजर डालते है
जब शरीर अन्दर जमे मल को पखाने,पेशाब,पसीने तथा स्वास के जरिये बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है और जरुरत से ज्यादा मल जब हमारे शरीर में रुकने लगता है…तो ही रोग शरीर में उत्पन होने लगते है या यू कहे की इस गंदगी का नाम ही रोग है ध्यान दिजिये दोस्तों अन्दर जमी हुई गंदगी का नाम ही रोग है

जिस तरह हम अपने कमरों की रोज झाड़ू- पोंचे से सफाई करते है,ठीक उसी तरह यह शरीर चारो मार्गो के दुआरा प्रतिदिन अपनी सफाई करता है….उदहारण के लिए जैसे हर महीने हम अपने घर में कभी कभार ख़ास सफाई करते है ठीक उसी तरह जब शरीर अव्यवस्थित हो जाता है या शरीर अशुद्ध हो जाता है

तो ये शरीर अपने चारों मार्ग पखाने,पेशाब,पसीने तथा स्वास के जरिये गन्दगी को बाहर नही निकाल पाता, तब शरीर में मौजूद (प्राणशक्ति) शरीर की सफाई करने के लिए इन चारों मार्गों के अलावा या तो शरीर का कोई अन्य मार्ग खोल देती है या पहले के चार मार्गों में से किसी एक को शीघ्रता से चला देती है ताकी गन्दगी बाहर निकले …

है ….जैसे खांसी,नजला,जुखाम, उलटी दस्त,गला खराब, बुखार होना, फोड़ा- फुंसी या असहनीय दर्द ये सब प्रचंड रोग के लक्षण है…ये शरीर की सफाई के लिए शीघ्र गति से आते है…ccc

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…आपका एक शेयर किसी के भी जीवन में परिवर्तन ला सकता है
हर व्यक्ति के लिए ये जानकारी बहुत ही लाभप्रद है…इसे whatsup…facbook…instagram के जरिये लोगो तक जरुर पहुचाये

जय श्री सीताराम जय हनुमान (सबका मंगल हो…सबका कल्याण हो…सबकी स्वास्थ्य मुक्ति हो)