प्राण शक्ति (Vital force)से ठीक होने का एवं स्वस्थ रहने का अदभुत रहस्य

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   बिना दवाई के ठीक होने का एवं स्वस्थ रहने का रहस्य- प्राकृतिक जीवन शैली अनेक प्रकार के साधारण और असाधारण रोग कैसे ठीक हो जाते है इसमें ऐसा क्या रहस्य है ? यह प्रश्न मन में उठना स्वभाविक है | इस प्रश्न का समाधान हमारी प्राण शक्ति(Vital Force)  में निहित है

   प्राण शक्ति का रहस्य (Secret of Vital Force )
जब कोई प्राणी शरीर धारण करता है उसी समय हमें ईश्वर की तरफ से प्राणशक्ति (Vital Force ) का एक कोटा (भण्डार ) मिलता है| रात को सोने के समय उस भंडार में से रोजाना सुबह शक्ति का एक अंश मिलता है |जिसे जीवनी शक्ति (Vital Power ) कहते है |

जीवनी शक्ति के द्वारा ही शरीर के सारे दैनिक काम होते है |चाहे वह भाग -दोड़ करने का काम हो या सोच-विचार का काम हो या खाना पचाने का काम हो अथवा रोगों को ठीक करने का काम हो शरीर के द्वारा ऐसा कोई भी कार्य नहीं होता जिसमे यह जीवनी शक्ति खर्च न हो जो शक्ति हमे रोजाना मिलती है वह उम्र बढने के साथ साथ धीरे धीरे कम होती जाती है |जैसे हमारे घरों में इनवर्टर लगे हुए है जैसे -जैसे उनकी बैटरी पुरानी होती जाती है वैसे -वैसे उसकी चार्ज होने की क्षमता कम होती जाती है ठीक ऐसे ही जैसे -जैसे हमारी उम्र बढती जाती है वैसे -वैसे हमारी जीवनी शक्ति कम होती है इसलिए हमारी युवा -अवस्था में भाग -दोड़ करने ,भोजन को पचाने, रोग को ठीक,करने आदि की शक्ति (सामर्थ्य )ज्यादा होती है और बड़ी उम्र में सभी शक्तिया (सामर्थ्य ) कम होती जाती है जैसे बच्चे की हड्डी टूट जाये तो जल्दी जुड़ जाती है और बडो की हड्डी जुड़ने में समय अधिक लगता है |इसको जीवन सिद्दांत (Law of Life ) कहा जाता है
हम देखते है कि शरीर में प्राणशक्ति के रहते हुए ही किसी भी दवा अथवा प्राकृतिक साधनों का अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है|प्राण निकलने के पश्चात सभी दवाइयों भी निष्क्रिय हो जाती है

जब हम परमात्मा को भूलकर मात्र तथाकथित स्वाद के उद्देश्य से भोजन (अप्राकृतिक खाद्य प्रदार्थ ) लेते है तब हमारे शरीर में रोग हो जाता है ये तो हमारा मन अन्धा है |मन की गलती के कारण शरीर को रोग रूपी सजा मिल रही है |डॉक्टर से दवा लेने की क्या जरूरत है? मन को समझाने की जरूरत है |जैसे चन्दन की लकड़ी में ही चन्दन का फल मोजूद है ऐसे ही मानव शरीर का मूल हमारी श्वासों की शक्ति प्राणशक्ति ही है |जब प्राणशक्ति शरीर से निकल जाती है तो शरीर उसी क्षण निष्क्रिय हो जाता है |अर्थात उस देह का अंत (देहांत )हो जाता है |फिर उस शरीर को न तो कोई दवाई दिलाता है और न ही कोई देता है |किसी भी दवाई में इतनी शक्ति नहीं है जो मृत (निष्क्रिय) शरीर को जीवित कर सके |इससे यह सिद्ध होता है कि शक्ति का स्त्रोत न भोजन में है न कैमिस्ट की दुकान में है और न ही टॉनिकों में है बल्कि स्वयं “प्राणशक्ति “ही शक्ति का स्त्रोत है |

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  प्राण शक्ति की कार्य प्रणाली

आइए !अब प्राण शक्ति का यह रहस्य शरीर में कैसे काम करता है इस पर चर्चा करें -हर प्रकार के रोगों को ठीक करने के यह प्रमुख आधार है |जरा गहराई से समझने की जरूरत है |जैसा कि पहले भाग में बताया गया है जब कुछ गलतियों की वजह से शरीर मल को प्रकृति द्वारा निर्धारित चार रास्तों (पखाने ,पेशाब ,पसीने ,तथा श्वास )द्वारा निकालने में असमर्थ हो जाता है तब मल शरीर के अंदर रुकना शुरु हो जाता है |उसी का नाम रोग है
जैसे हम अपने घर की रोज सफाई करते है ठीक वैसे ही जब शरीर चार रास्तों के द्वारा रोज अपनी सफाई करता है |जैसे हम अपने घर में कभी कभी विशेष (Special )सफाई करता है |ठीक वैसे ही जब शरीर में विकार और गलतिया अधिक हो जाती है और शरीर चार रास्तों के द्वारा मल को बाहर नहीं निकाल पाता ,तब वैधनाथ (Healing power ) शरीर की सफाई करने के लिए शरीर का कोई पांचवां रास्ता खोल देते है या पहले के चार रास्तों में से किसी एक को तेजी से चला देते है | इसको तीव्र रोग (एक्यूट डिजीज)कहते है |

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