बिना दवाई के शरीर को स्वस्थ(healthy body) रखने का रहस्य

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शरीर को रखे स्वस्थ(healthy body) प्राण शक्ति के रहस्य से

पेट में ढेरो दवाइयां डालने से पहले ये पता होना जरुरी है की हमारा शरीर खुद रोगों से लड़ सकता है। और ये पॉवर हमे ईश्वर की तरफ से मिली है। और सम्पूर्ण मानव जात से साथ साथ जितने भी जीवधारी जो इस धरती पर जन्मे है या विचरण करते है उन सबको परमात्मा ने ये शक्ति शरीर धारण करते समय दी है जिसे “प्राण शक्ति” कहते है।

ये शक्ति एक कोटा (भण्डार) के रूप में हमारे अन्दर है,इस भण्डार में से हमे रोजाना शक्ति का अंश मिलता है,जिसे “जीवनी शक्ति” कहते है। इस जीवनी शक्ति के द्वारा ही शरीर के सारे दैनिक काम होते है, चाहे वह भाग दौड़ करने का काम हो या सोच-विचार का काम हो,खाना पचाने का काम हो या फिर रोगों को ठीक करने का काम शरीर के द्वारा ऐसा कोई भी कार्य नही होता।

जिसमे यह शक्ति खर्च न हो जो शक्ति हमे रोजाना मिलती है वह उम्र बढ़ने के साथ के साथ धीरे धीरे कम होती जाती है, जैसे हमारे घरों में इनवर्टर लगे हुए है,जैसे जैसे उनकी बैटरी पुरानी होती जाती है, वैसे वैसे उसकी चार्ज होने की क्षमता कम होती जाती है। ठीक ऐसे ही जैसे जैसे हमारी उम्र बढती जाती है वैसे वैसे हमारी जीवनी शक्ति कम होती जाती है।

इसलिए हमारी युवा अवस्था में भाग दौड़ करने,भोजन को पचाने और रोगों को ठीक करने आदि में ये शक्ति(सामर्थ्य) ज्यादा होती है। और बड़ी उम्र में कम जैसे बच्चे की हड्डी टूट जाए तो जल्दी जुड़ जाती है। और बडो की हड्डी जुड़ने में समय अधिक लगता है इसको जीवन सिद्धांत कहा जाता है।

शरीर में मौजूद प्राणशक्ति हर प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए प्रमुख आधार है। बस जरुरत है इसे गहराई से समजने की। अब थोडा शरीर में मौजूद गंदगी पर नजर डालते है जब शरीर अन्दर जमे मल को पखाने,पेशाब,पसीने तथा श्वास के जरिये बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है।

और जरुरत से ज्यादा मल जब हमारे शरीर में रुकने लगता है उसी का नाम रोग है जैसे हम अपने घर की रोज सफाई करते है,ठीक वैसे ही यह शरीर चार रास्तों के द्वारा रोज अपनी सफाई करता है। जैसे हम अपने घर में कभी कभी विशेष (स्पेशल)सफाई करते है ठीक वैसे ही जब शरीर में विकार और गलतिया अधिक हो जाती है। और शरीर जब चार रास्तों के द्वारा मल को बाहर नही निकाल पाता,

तब वैद्यनाथ (प्राणशक्ति) शरीर की सफाई करने के लिए शरीर का कोई पांचवा रास्ता खोल देती है। या पहले के चार रास्तों में से किसी एक को तेजी से चला देती है ताकी गन्दगी बाहर निकले। और ये तीव्र रोग कहलाते है जैसे नजला,जुखाम ,खांसी,गला खराब, उलटी दस्त,बुखार, फोड़ा- फुंसी या असहनीय दर्द ये सब तीव्र रोग के लक्षण है।

ये शरीर की सफाई के लिए तीव्र गति से आते है। अगर प्राकृतिक जीवन शैली द्वारा इनका इलाज किया जाए तो आमतौर पर दो-तीन दिन में ठीक हो जाते है। रोग कई प्रकार के नही होते, रोग तो एक ही है,और वो है शरीर के अन्दर विजातीय द्रव्य का इकट्ठा होना। रोग आने की पहली अवस्था है तीव्र रोग,तीव्र रोगों को बिना दवाई के कैसे ठीक करना चाहिए ?

अगर व्यक्ति इसको समझ लें। तो उसे दूसरी अवस्था वाले रोग यानि मंद रोग जैसे जोड़ो का दर्द,मोटापा,उच्च रक्तचाप, मधूमेह, रसौली,पथरी,आदि इसके साथ ही तीसरी अवस्था वाले रोग यानि मारक रोग जैसे हृदय रोग, कैंसर,लकवा,आदि रोग उसके पास कभी आयेंगे ही नही।

जीवनी शक्ति एक उपचारक शक्ति है जिससे आप किसी भी रोग का इलाज कर सकते है। पर आपको ये जानना जरुरी है कि यह किस तरह से काम करती है। शरीर में कुछ भी पचने के लिए नही होता तब ये उपचारक शक्ति शरीर को ठीक करने में लग जाती है। इसलिए आयुर्वेद में बार बार खाने की मनाही है, जितनी बार खाओगे जीवनी शक्ति उतनी ही व्यस्त रहेगी,

पेट जब खाली रहेगा तब ये शक्ति शरीर में कहा गड़बड़ है। उसका पता लगाकर उसको हिलिंग देना शुरू कर देती है वे चाहे कितना ही बड़ा रोग क्यू न हो ,जीवनी शक्ति को इससे कोई मतलब नही होता की यह रोग कौनसा है। वो सिर्फ ठीक करना जानती है,और इसलिए भी हमारे हिन्दू धर्म में उपवास का नियम है। उपवास करने पर शरीर में जब कुछ नही होता तब शरीर हीलिंग पर होता है।

आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद भोजन करना अच्छा नही बताया है, उसका असली कारण हीलिंग प्रोसेस ही है, ताकि शरीर को समय मिल सके अपने आप को ठीक करने के लिए। पर आज इस दौर में सब कुछ उलट है, और उसी का नतीजा भी भुगत रहे है, हॉस्पिटल ठकाठक-2 भरे जा रहे है। बिमारियां कम होने का नाम ही नही ले रही, और हम कह रहे है की देश बदल रहा है।

हमें ये कभी नही भूलना चाहिए की हम इस धरती पर किरायेदार है पहले हमारे पूर्वज किरायेदार थे रहेंगे, और आज उन्होंने संस्कृति को बचाए रखा वातावरण को बचाए रखा सिर्फ हमारे लिए, पर अभी हवा को खराब किया हमने ,जल को दूषित किया हमने ,खाने पीने की चीजो में मिलावट की हमने, सब्जियों में जहर छिड़का हमने,ना खाने का पता की क्या खा रहे है। न यह पता की कब खाना है और फिर भी हम गर्व से कहते है की बहुत तरक्की की हमने। अगर विज्ञान ने इतनी तरक्की की तो आज इतनी बिमारिया क्यों है? ये सवाल आपके मन में उठना चाहिये

सारे रोगों की उत्पति अन्दर जमी गंदगी की देन है। और ये गंदगी उन चीजो को खाने से सबसे ज्यादा बढती है जो
सूखी होती है। जिनमें पानी की मात्रा 0 होती हो या व सारी चीजे जो अप्राकृतिक है। जिनको मनुष्य ने अपने स्वाद के लिए बनाया है।
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